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तथ्य जांचा गयाअंतिम अपडेट: 21 जुलाई 2026समीक्षक: ComplaintAdda Real Estate & RERA Legal Desk

रेरा (RERA) बिल्डर विलंब, पज़ेशन डिफ़ॉल्ट एवं होमबायर्स रिफंड कानूनी समाधान गाइड

भारत में रियल एस्टेट कारोबार **रियल एस्टेट (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2016 (RERA एक्ट)**, राज्य रेरा प्राधिकरणों (जैसे MahaRERA, UP RERA, HRERA) और **इंसाॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड, 2016 (IBC)** के तहत विनियमित है। होमबायर्स अपने जीवन भर की बचत फ्लैट बुकिंग में लगाते हैं। इसके बावजूद बिल्डरों द्वारा गंभीर डिफ़ॉल्ट किया जाता है: (1) **पज़ेशन में अत्यधिक देरी**: बिल्डर-बायर्स एग्रीमेंट (BBA) में दी गई समयसीमा बीतने के बाद भी फ्लैट का पज़ेशन न देना। (2) **मासिक विलंब ब्याज न देना**: देरी के दौरान खरीदारों को मासिक ब्याज देने से इनकार करना। (3) **बिना सहमति नक्शा बदलना**: धारा 14(2) के तहत दो-तिहाई खरीदारों की लिखित सहमति के बिना परियोजना लेआउट या हरित क्षेत्र बदलना। (4) **संरचनात्मक कमियां (Structural Defects)**: पज़ेशन के बाद दीवारों में दरारें या घटिया निर्माण सामग्री की शिकायतें दूर न करना। (5) **अपंजीकृत प्रोजेक्ट्स**: बिना रेरा रजिस्ट्रेशन के फ्लैट बेचना। होमबायर्स को कड़े वैधानिक अधिकार प्राप्त हैं: (1) **रेरा अधिनियम 2016 की धारा 18 (रिफंड व ब्याज का अधिकार)**: यदि बिल्डर तय समय में पज़ेशन देने में विफल रहता है, तो खरीदार को पूर्ण अधिकार है: (A) प्रोजेक्ट से हटकर 100% जमा राशि **SBI MCLR + 2% वैधानिक ब्याज** और मुआवजे के साथ वापस पाना, अथवा (B) प्रोजेक्ट में बने रहकर पज़ेशन मिलने तक **प्रति माह वैधानिक ब्याज (SBI MCLR + 2%)** प्राप्त करना। (2) **धारा 14(3) (5-साल की संरचनात्मक वारंटी)**: पज़ेशन के **5 साल** के भीतर निर्माण में किसी भी दरार या खराबी को बिल्डर द्वारा मुफ़्त ठीक करना अनिवार्य है। (3) **IBC के तहत वित्तीय लेनदार का दर्जा**: होमबायर्स NCLT में डिफ़ॉल्टर बिल्डर के खिलाफ दिवालिया प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं।

विषय विशेषज्ञ सलाह एवं महत्वपूर्ण बारीकियां

रेरा अधिनियम 2016 की धारा 18 के तहत होमबायर्स को 100% रिफंड व SBI MCLR + 2% वैधानिक ब्याज का अधिकार है। धारा 40 RC के तहत जिलाधिकारी बिल्डर का बैंक खाता सीज कर सकते हैं।

यह क्या है

रेरा बिल्डर विवाद एवं समाधान व्यवस्था पज़ेशन विलंब रिफंड, मासिक ब्याज की गणना, नक्शा बदलाव चुनौती और रेरा रिकवरी सर्टिफिकेट निष्पादन की वैधानिक प्रक्रिया है। मुख्य कानूनी नियम: (1) रेरा अधिनियम की धारा 18 (रिफंड व ब्याज नियम): पज़ेशन तिथि से भुगतान तक देय ब्याज की वैधानिक दर (वर्तमान में SBI MCLR + 2% प्रतिवर्ष)। (2) धारा 31 एवं धारा 40 रेरा निष्पादन: रेरा बेंच / न्यायनिर्णायक अधिकारी के पास शिकायत। बिल्डर द्वारा रेरा आदेश न मानने पर रेरा **रिकवरी सर्टिफिकेट (RC)** जारी करता है, जिससे जिलाधिकारी बिल्डर के बैंक खाते और संपत्तियां कुर्क कर रकम वसूलते हैं। (3) धारा 14(2) नक्शा परिवर्तन नियम: 2/3 खरीदारों की लिखित सहमति के बिना लेआउट में बदलाव प्रतिबंधित। (4) IBC धारा 7 NCLT दिवालिया केस: 100 खरीदार या 10% अलॉटी मिलकर NCLT में डिफ़ॉल्टर बिल्डर को हटाकर दिवालिया प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं। (5) उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम: रिफंड व हर्जाने का वैकल्पिक मंच।

इसका उपयोग कब करें

यदि बिल्डर BBA में तय तिथि तक फ्लैट पज़ेशन देने में विफल रहा है, धारा 18 के तहत मासिक विलंब ब्याज देने से मना कर रहा है, सुपर एरिया के नाम पर अवैध अतिरिक्त मांग कर रहा है, बिना सहमति कॉमन एरिया का नक्शा बदला है, या 5 साल के भीतर फ्लैट की दरारें/खराबी ठीक नहीं कर रहा, तो तुरंत इस गाइड का उपयोग करें।

चरण-दर-चरण प्रक्रिया

  1. 1चरण 1: राज्य RERA पोर्टल पर प्रोजेक्ट रजिस्ट्रेशन व पज़ेशन तिथि जांचें। अपने राज्य की रेरा वेबसाइट (जैसे rera.up-in.gov.in, maharera.mahaonline.gov.in, haryanarera.gov.in) पर जाएं। प्रोजेक्ट का RERA नंबर से सत्यापन करें। बिल्डर-बायर्स एग्रीमेंट (BBA) की तय पज़ेशन तिथि से तुलना करें।
  2. 2चरण 2: रिफंड या धारा 18 विलंब ब्याज हेतु 15 दिनों का लीगल नोटिस भेजें। एडवोकेट द्वारा बिल्डर निदेशकों को रजिस्टर्ड डाक से नोटिस भेजें। स्पष्ट रूप से चुनें: (विकल्प A) धारा 18 के तहत 100% रिफंड + SBI MCLR + 2% ब्याज, अथवा (विकल्प B) पज़ेशन मिलने तक प्रति माह वैधानिक विलंब ब्याज।
  3. 3चरण 3: राज्य RERA पोर्टल पर धारा 31 के तहत ऑनलाइन शिकायत दर्ज करें। राज्य रेरा पोर्टल में 'File Complaint' पर जाएं। शिकायत फॉर्म ('Form M' अथॉरिटी हेतु या 'Form N' न्यायनिर्णायक अधिकारी हेतु) चुनें, BBA एग्रीमेंट, भुगतान रसीदें अपलोड करें और ऑनलाइन फीस (₹1,000) भरकर शिकायत दर्ज करें।
  4. 4चरण 4: रेरा बेंच सुनवाई में शामिल हों और रिकवरी सर्टिफिकेट (RC) प्राप्त करें। रेरा बेंच 45-60 दिनों में फैसला सुनाकर रिफंड या ब्याज का आदेश देती है। बिल्डर द्वारा 30 दिनों में आदेश न मानने पर धारा 40 के तहत निष्पादन याचिका दायर करें। रेरा जिलाधिकारी को बैंक खाता कुर्क करने हेतु **Recovery Certificate (RC)** भेजता है।
  5. 5चरण 5: NCLT में IBC धारा 7 के तहत दिवालिया याचिका या उपभोक्ता केस करें। प्रोजेक्ट पूरी तरह ठप होने पर बायर्स एसोसिएशन बनाएं। NCLT में IBC धारा 7 के तहत केस कर डिफ़ॉल्टर बिल्डर प्रबंधन को हटाकर प्रोजेक्ट पूरा कराने का आदेश लें।

आवश्यक दस्तावेज़

  • पंजीकृत बिल्डर-बायर्स एग्रीमेंट (BBA) / अलॉटमेंट लेटर (तय पज़ेशन तिथि सहित)
  • बिल्डर को किए गए कुल भुगतान को दर्शाने वाली बैंक पासबुक स्टेटमेंट और आधिकारिक भुगतान रसीदें
  • राज्य RERA प्रोजेक्ट रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट और त्रैमासिक प्रगति रिपोर्ट (QPR) का प्रिंटआउट
  • बिल्डर को भेजे गए लीगल नोटिस की प्रति और स्पीड पोस्ट ट्रैकिंग पावती रसीदें
  • साइट पर अधूरे निर्माण या संरचनात्मक कमियों (दरारें, सीपेज) की तस्वीरें/वीडियो साक्ष्य
  • राज्य RERA पोर्टल पर सबमिट किए गए Form M / Form N शिकायत पत्र की प्रति

शुल्क

राज्य RERA पोर्टल (जैसे UP RERA, MahaRERA, HRERA) पर शिकायत दर्ज करने की आधिकारिक फीस केवल ₹1,000 से ₹2,500 होती है। रेरा में शिकायत हेतु वकील रखना अनिवार्य नहीं है; खरीदार स्वयं या होमबायर्स एसोसिएशन के माध्यम से पैरवी कर सकते हैं।

प्रोसेसिंग समय

राज्य रेरा बेंच सुनवाई और अंतिम फैसले का 60 दिनों में निपटारा अनिवार्य है। धारा 40 के तहत जारी रिकवरी सर्टिफिकेट (RC) का निष्पादन जिलाधिकारी द्वारा 30-60 दिनों में होता है। NCLT धारा 7 दिवालिया केस में 6 से 12 महीने लगते हैं।

महत्वपूर्ण सुझाव

  • धारा 18 के तहत हमेशा SBI MCLR + 2% वैधानिक ब्याज की मांग करें: रेरा कानून में ब्याज की दर SBI MCLR + 2% प्रतिवर्ष तय है। एग्रीमेंट में मामूली हर्जाने (जैसे ₹5/वर्ग फुट/माह) वाले एकतरफा क्लॉज को रेरा पूरी तरह खारिज कर देता है।
  • धारा 14(3) के तहत 5-साल की संरचनात्मक वारंटी का उपयोग करें: पज़ेशन के 5 साल के भीतर दीवार दरारें या सीपेज होने पर बिल्डर को नोटिस दें। 30 दिनों में मुफ़्त मरम्मत करना बिल्डर के लिए अनिवार्य है।
  • जिलाधिकारी द्वारा बैंक खाता सीज कराने हेतु धारा 40 RC का उपयोग करें: यदि बिल्डर रेरा रिफंड आदेश नहीं मानता, तो धारा 40 निष्पादन में जाएं। जिलाधिकारी **Recovery Certificate (RC)** जारी कर बिल्डर का बैंक खाता सीज करते हैं।
  • NCLT केस हेतु पंजीकृत होमबायर्स एसोसिएशन बनाएं: NCLT में IBC धारा 7 के तहत बिल्डर को हटाने हेतु 100 खरीदार या 10% अलॉटी का एक साथ आना आवश्यक है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रेरा अधिनियम 2016 की धारा 18 के तहत तय तिथि तक पज़ेशन न मिलने पर खरीदार को दो अधिकार प्राप्त हैं: (1) प्रोजेक्ट से हटकर **100% रिफंड + SBI MCLR + 2% वैधानिक ब्याज** और मुआवजा पाना, अथवा (2) प्रोजेक्ट में बने रहकर पज़ेशन मिलने तक **प्रति माह वैधानिक ब्याज (SBI MCLR + 2%)** पाना।
रेरा नियमों के तहत बिल्डर विलंब मुआवजे (और खरीदार द्वारा विलंबित किश्तों) हेतु देय वैधानिक ब्याज दर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की सर्वोच्च MCLR दर + 2% प्रतिवर्ष तय है।
जी नहीं। रेरा अधिनियम की धारा 14(2) के अनुसार बिल्डर परियोजना के स्वीकृत नक्शे, लेआउट या कॉमन सुविधाओं में कम से कम **दो-तिहाई (2/3rd) खरीदारों** की पूर्व लिखित सहमति के बिना कोई बदलाव नहीं कर सकता।
रेरा अधिनियम 2016 की धारा 14(3) के अनुसार पज़ेशन सौंपने के **5 साल** के भीतर निर्माण में किसी भी दरार, संरचनात्मक कमी या सीपेज की शिकायत मिलने पर बिल्डर को 30 दिनों में मुफ़्त मरम्मत करना अनिवार्य है।
यदि बिल्डर 30 दिनों में रेरा रिफंड या ब्याज आदेश का पालन नहीं करता, तो रेरा धारा 40 के तहत जिलाधिकारी को **Recovery Certificate (RC)** भेजता है। जिलाधिकारी भू-राजस्व बकाये की भांति बिल्डर के बैंक खाते कुर्क कर संपत्ति नीलाम करते हैं।
हाँ। इंसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC) 2016 के तहत होमबायर्स को 'फाइनेंशियल क्रेडिटर' का कानूनी दर्जा प्राप्त है। प्रोजेक्ट के कम से कम 100 खरीदार या 10% अलॉटी मिलकर NCLT में डिफ़ॉल्टर बिल्डर के खिलाफ दिवालिया केस दर्ज कर सकते हैं।
जी नहीं। सुप्रीम कोर्ट (*Pioneer Urban*) ने फैसला सुनाया है कि खरीदारों पर भारी जुर्माना लगाने और बिल्डर विलंब पर मामूली मुआवजा देने वाले एकतरफा एग्रीमेंट 'Unfair Trade Practice' हैं और कानूनन अमान्य हैं।
रेरा अधिनियम 2016 की धारा 59 के तहत बिना रेरा रजिस्ट्रेशन प्रोजेक्ट का विज्ञापन, बुकिंग या फ्लैट बेचने पर बिल्डर पर प्रोजेक्ट की कुल अनुमानित लागत का **10% तक जुर्माना** और 3 साल तक की जेल हो सकती है।
यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है और कानूनी सलाह नहीं है। कार्रवाई करने से पहले हमेशा आधिकारिक स्रोत से पुष्टि करें।