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तथ्य जांचा गयाअंतिम अपडेट: 21 जुलाई 2026समीक्षक: ComplaintAdda Banking Dispute Advisory Cell

बैंक शिकायत एवं आरबीआई लोकपाल समाधान गाइड

भारत भर में बैंकिंग विवाद और सेवा में कमियां सबसे प्रमुख उपभोक्ता शिकायतों में से एक हैं। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नियमों के तहत, प्रत्येक अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक, स्मॉल फाइनेंस बैंक, पेमेंट बैंक और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (NBFC) के लिए एक पारदर्शी, समयबद्ध तीन-स्तरीय शिकायत निवारण तंत्र बनाए रखना अनिवार्य है। चाहे आपका मामला असफल एटीएम नकद निकासी, अनधिकृत डेबिट कार्ड या नेट बैंकिंग लेनदेन, छिपे हुए खाता रखरखाव शुल्क, या अनुचित लोन रिकवरी उत्पीड़न से संबंधित हो, ग्राहकों के पास 'आरबीआई एकीकृत लोकपाल योजना, 2021' के तहत वैधानिक अधिकार हैं। यदि आपका बैंक 30 दिनों के भीतर आपकी शिकायत का समाधान करने में विफल रहता है, तो आप आरबीआई के ऑनलाइन सीएमएस (CMS) पोर्टल cms.rbi.org.in के माध्यम से मुफ्त में आरबीआई लोकपाल के पास शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

विषय विशेषज्ञ सलाह एवं महत्वपूर्ण बारीकियां

आरबीआई के सीमित दायित्व सर्कुलर के अनुसार, अनधिकृत इलेक्ट्रॉनिक बैंक कटौती की सूचना 3 कार्य दिवसों के भीतर देने पर ग्राहक की पूर्ण 'शून्य देनदारी' होती है। इसके अलावा, असफल एटीएम निकासी का रिफंड 5 दिनों में न होने पर बैंक को ₹100/दिन हर्जाना देना अनिवार्य है।

यह क्या है

बैंक शिकायत किसी बैंकिंग संस्थान के खिलाफ सेवा में कमी, नियामक गैर-अनुपालन या वित्तीय लापरवाही के लिए दर्ज की गई एक औपचारिक शिकायत है। आरबीआई दिशानिर्देशों के तहत शिकायत दर्ज करने के मुख्य आधारों में शामिल हैं: (1) असफल एटीएम नकद निकासी जहाँ खाता डेबिट हो जाता है लेकिन एटीएम से नकद नहीं निकलता या कम निकलता है। (2) साइबर सेंध, कार्ड क्लोनिंग, या धोखाधड़ी वाले IMPS/NEFT/UPI ट्रांसफर से उत्पन्न अनधिकृत इलेक्ट्रॉनिक डेबिट। (3) चेक, ईसीएस मैंडेट क्लीयरेंस में अत्यधिक देरी या ब्याज/सब्सिडी राशि जमा करने में देरी। (4) पूर्व सूचना के बिना न्यूनतम बैलेंस न रखने पर जुर्माना, छिपे हुए शुल्क या अनुचित लोन प्रीक्लोजर शुल्क वसूलना। (5) गलत वित्तीय उत्पाद बेचना (जैसे फिक्स्ड डिपॉजिट या लोन के नाम पर जबरन इंश्योरेंस पॉलिसी बेचना)। (6) लोन क्लोजर के बाद मूल संपत्ति दस्तावेज वापस न करना या वसूली एजेंटों द्वारा उत्पीड़न।

इसका उपयोग कब करें

जब भी आपका बैंक किसी वित्तीय त्रुटि को सुधारने में विफल रहता है, आपकी लिखित शिकायत की अनदेखी करता है, या अनधिकृत कटौती राशि का रिफंड करने से इनकार करता है, तो इस समाधान गाइड का उपयोग करें। आरबीआई लोकपाल के पास जाने से पहले अपने बैंक (शाखा प्रबंधक या नोडल अधिकारी) को लिखित शिकायत जमा करना और 30 दिन की प्रतीक्षा करना अनिवार्य है।

चरण-दर-चरण प्रक्रिया

  1. 1चरण 1: बैंक शाखा या ग्राहक पोर्टल पर तत्काल लिखित शिकायत दर्ज करें। अपनी बैंक शाखा के प्रबंधक को लिखित शिकायत दें या बैंक के नेट बैंकिंग पोर्टल पर ऑनलाइन टिकट दर्ज करें। यह सुनिश्चित करें कि आपको आधिकारिक शिकायत टिकट नंबर, सर्विस रिक्वेस्ट (SR) आईडी या मुहर लगी पावती प्रति मिले।
  2. 2चरण 2: वैधानिक समयसीमा का ध्यान रखें (एटीएम के लिए T+5, डिजिटल भुगतान के लिए T+1)। आरबीआई के टीएटी (TAT) सर्कुलर के अनुसार, असफल एटीएम निकासी का पैसा 5 दिनों (T+5) में और असफल डिजिटल लेनदेन 1 दिन (T+1) में वापस होना चाहिए। देरी होने पर बैंक को ₹100 प्रति दिन का स्वतः मुआवजा आपके खाते में जमा करना होगा।
  3. 3चरण 3: बैंक के प्रधान नोडल अधिकारी (PNO) को शिकायत भेजें। यदि शाखा 10 से 15 दिनों में समाधान नहीं करती है, तो बैंक की वेबसाइट से प्रधान नोडल अधिकारी (PNO) का विवरण लें और शुरुआती टिकट नंबर व साक्ष्यों के साथ पंजीकृत ईमेल या डाक से अपील भेजें।
  4. 4चरण 4: आरबीआई के ऑनलाइन पोर्टल cms.rbi.org.in पर जाएं। यदि 30 दिन बीत जाने के बाद भी समाधान नहीं मिलता है या नोडल अधिकारी शिकायत खारिज कर देता है, तो cms.rbi.org.in पर 'File a Complaint' बटन पर क्लिक करें।
  5. 5चरण 5: सीएमएस पोर्टल पर संस्था और शिकायत का विवरण दर्ज करें। बैंक की श्रेणी (सरकारी, निजी, सहकारी, या एनबीएफसी) और बैंक का नाम चुनें, शाखा का पता दर्ज करें, और सेवा में कमी की सही श्रेणी (जैसे 'एटीएम/डेबिट कार्ड', 'अनधिकृत इलेक्ट्रॉनिक लेनदेन') चुनें।
  6. 6चरण 6: आवश्यक सहायक दस्तावेज अपलोड करें। विवादित कटौती को दर्शाने वाला बैंक स्टेटमेंट, बैंक को भेजी गई मूल शिकायत, नोडल अधिकारी का जवाब (यदि कोई हो), एटीएम रसीद और पहचान प्रमाण की पीडीएफ फाइल अपलोड करें।
  7. 7चरण 7: लोकपाल जांच और निर्णय को ट्रैक करें। सबमिट करने पर 15-अंकों का आरबीआई सीएमएस संदर्भ नंबर प्राप्त करें। ऑनलाइन पोर्टल या हेल्पलाइन 14440 पर स्टेटस ट्रैक करें। लोकपाल बैंक को बाध्यकारी आदेश जारी करता है, जिसमें वित्तीय नुकसान के लिए ₹20 लाख तक और मानसिक प्रताड़ना के लिए ₹1 लाख तक का मुआवजा दिया जा सकता है।

आवश्यक दस्तावेज़

  • विवादित लेनदेन और तारीख को दर्शाने वाली बैंक स्टेटमेंट या पासबुक की प्रति
  • शाखा प्रबंधक या ग्राहक सेवा पोर्टल पर दर्ज पहली शिकायत की प्रति या पावती ईमेल
  • बैंक के नोडल अधिकारी या शिकायत सेल से प्राप्त लिखित जवाब या अस्वीकृति पत्र की प्रति
  • भौतिक एटीएम पर्ची, लेनदेन विफलता रसीद, या पीओएस मशीन की पर्ची (यदि लागू हो)
  • खाताधारक का सरकारी पहचान प्रमाण (आधार कार्ड, पैन कार्ड, वोटर आईडी या पासपोर्ट)
  • पुलिस एफआईआर की प्रति या साइबर अपराध पोर्टल शिकायत रसीद (अनधिकृत साइबर धोखाधड़ी के मामलों में)

शुल्क

निःशुल्क। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) एकीकृत लोकपाल शिकायत निवारण प्रक्रिया सभी बैंक खाताधारकों के लिए पूरी तरह से मुफ्त है। बैंक या आरबीआई द्वारा कोई फाइलिंग शुल्क या प्रोसेसिंग फीस नहीं ली जाती।

प्रोसेसिंग समय

आरबीआई नियमों के अनुसार: (1) असफल एटीएम लेनदेन 5 दिनों (T+5) में रिवर्स होना चाहिए। देरी पर ₹100/दिन मुआवजा मिलता है। (2) असफल यूपीआई/आईएमपीएस लेनदेन T+1 दिन में वापस होना चाहिए। (3) प्राथमिक बैंक शिकायत का समय 30 दिन है। (4) आरबीआई लोकपाल द्वारा जांच और अंतिम निर्णय में 30 से 60 दिन का समय लगता है।

महत्वपूर्ण सुझाव

  • जब भी अपनी बैंक शाखा में भौतिक शिकायत पत्र जमा करें, तो तारीख और संदर्भ संख्या वाली लिखित पावती मुहर जरूर लें।
  • अनधिकृत साइबर लेनदेन के मामलों में, आरबीआई परिपत्र के तहत पूर्ण 'शून्य देनदारी' (Zero Liability) सुरक्षा पाने के लिए 3 कार्य दिवसों के भीतर रिपोर्ट करें।
  • अपने हर्जाने की सही गणना करें: यदि 10वें दिन एटीएम विफलता का पैसा वापस आता है, तो बैंक पर आपका ₹500 (5 विलंबित दिन × ₹100/दिन) का हर्जाना बनता है।
  • बैंक कर्मियों के साथ भी अपने पासवर्ड, डेबिट कार्ड पिन या सीवीवी नंबर साझा न करें।
  • आरबीआई लोकपाल के पास आसानी से आवेदन करने के लिए सभी ईमेल, बैंक स्टेटमेंट और शिकायत संदर्भ आईडी की पीडीएफ फाइलें सुरक्षित रखें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आरबीआई सर्कुलर के अनुसार, यदि बैंक असफल एटीएम लेनदेन का पैसा 5 दिनों (T+5) के भीतर वापस करने में विफल रहता है, तो बैंक को छठे दिन से ₹100 प्रति दिन का हर्जाना ग्राहक के खाते में स्वतः जमा करना होगा। इसके लिए किसी अलग आवेदन पत्र की आवश्यकता नहीं है।
आरबीआई के 2017 के सर्कुलर के अनुसार: (1) यदि तीसरे पक्ष के उल्लंघन के कारण धोखाधड़ी हुई है और ग्राहक 3 कार्य दिवसों के भीतर बैंक को सूचित करता है, तो ग्राहक की 'शून्य देनदारी' (Zero Liability) होती है। (2) 4 से 7 दिनों के भीतर रिपोर्ट करने पर सीमित देनदारी (अधिकतम ₹10,000) होती है। (3) यदि ग्राहक ने स्वयं ओटीपी या पासवर्ड साझा किया है, तो रिपोर्ट करने की तिथि तक पूरी जिम्मेदारी ग्राहक की होती है।
नहीं। आरबीआई एकीकृत लोकपाल प्रणाली का नियम है कि आपको पहले संबंधित बैंक के पास लिखित शिकायत दर्ज करानी होगी। आप केवल तभी लोकपाल के पास जा सकते हैं जब: (क) शिकायत दर्ज कराने के 30 दिन बीत चुके हों और समाधान न मिला हो, (ख) बैंक ने शिकायत खारिज कर दी हो, या (ग) आप बैंक के जवाब से असंतुष्ट हों।
आरबीआई एकीकृत लोकपाल योजना, 2021 के तहत, लोकपाल बैंक की लापरवाही के कारण हुए वास्तविक वित्तीय नुकसान की भरपाई (अधिकतम ₹20 लाख तक) का आदेश दे सकता है। इसके अलावा, मानसिक प्रताड़ना, उत्पीड़न और कानूनी खर्चों के लिए ₹1 लाख तक का अतिरिक्त मुआवजा दिया जा सकता है।
जब कोई धोखाधड़ी वाला लेनदेन आपके खाते से होकर गुजरता है, तो साइबर पुलिस धारा 102 CrPC (या बीएनएसएस) के तहत बैंक खाते पर लीन (Lien) लगाकर उसे फ्रीज करवा देती है। अपनी बैंक शाखा से साइबर सेल शिकायत संख्या (1930 पोर्टल पावती नंबर) और जांच अधिकारी का विवरण मांगें। अपने वास्तविक व्यापारिक या व्यक्तिगत साक्ष्य साइबर सेल को सौंपकर नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) प्राप्त करें।
हां। बैंक अधिकारियों द्वारा इंश्योरेंस या म्यूचुअल फंड की गलत बिक्री (विशेष रूप से एफडी या लोन के नाम पर वरिष्ठ नागरिकों को बेचना) आरबीआई और आईआरडीएआई नियमों के तहत एक गंभीर अपराध है। प्रीमियम राशि की 100% वापसी के लिए बैंक के नोडल अधिकारी और फिर आरबीआई लोकपाल के पास शिकायत दर्ज कराएं।
आपको बैंक का अंतिम जवाब मिलने के 1 वर्ष के भीतर, या यदि बैंक ने कोई जवाब नहीं दिया है तो बैंक को भेजी गई पहली शिकायत की तारीख से 1 वर्ष 30 दिनों के भीतर आरबीआई लोकपाल के पास शिकायत दर्ज करानी होगी।
आरबीआई दिशानिर्देशों के अनुसार, खाते में न्यूनतम शेष राशि कम होने पर बैंकों को पहले एसएमएस/ईमेल से सूचित करना होगा और जुर्माना लगाने से पहले 30 दिन की मोहलत देनी होगी। यदि बिना पूर्व सूचना के जुर्माना काटा गया है, तो बैंक से राशि वापस करने की मांग करें।
प्रधान नोडल अधिकारी (PNO) बैंक के भीतर सर्वोच्च आंतरिक शिकायत निवारण प्राधिकारी होता है। शाखा स्तर पर अनसुलझी शिकायतों को दूर करने के लिए PNO के पास आवेदन करना अनिवार्य दूसरा चरण है।
यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है और कानूनी सलाह नहीं है। कार्रवाई करने से पहले हमेशा आधिकारिक स्रोत से पुष्टि करें।