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तथ्य जांचा गयाअंतिम अपडेट: 21 जुलाई 2026समीक्षक: ComplaintAdda Banking Dispute Advisory Cell

क्रेडिट कार्ड धोखाधड़ी एवं अनधिकृत लेनदेन चार्जबैक गाइड

क्रेडिट कार्ड धोखाधड़ी भारतीय उपभोक्ताओं को निशाना बनाने वाले साइबर अपराध की सबसे गंभीर श्रेणियों में से एक है। जालसाज अंतर्राष्ट्रीय भुगतान गेटवे (जहाँ ओटीपी की आवश्यकता नहीं होती), पेट्रोल पंपों या एटीएम पर भौतिक पीओएस कार्ड स्किमिंग, कार्ड क्लोनिंग और लिमिट बढ़ाने के नाम पर फर्जी कॉल के जरिए हजारों रुपये चुरा लेते हैं। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के दिशानिर्देशों—विशेष रूप से क्रेडिट कार्ड व डेबिट कार्ड मास्टर निर्देश (2022) और ग्राहक सीमित दायित्व परिपत्र (2017)—के तहत कार्डधारकों को मजबूत वैधानिक सुरक्षा प्राप्त है। यदि आप अनधिकृत कटौती के 3 कार्य दिवसों के भीतर अपना कार्ड ब्लॉक करके बैंक के पास लिखित विवाद दर्ज कराते हैं, तो आपकी वैधानिक देनदारी 'शून्य' होती है और बैंक को जांच लंबित रहने तक 10 दिनों में अस्थायी रिफंड (Shadow Credit) देना अनिवार्य है।

विषय विशेषज्ञ सलाह एवं महत्वपूर्ण बारीकियां

आरबीआई मास्टर निर्देशों के अनुसार, अनधिकृत क्रेडिट कार्ड कटौती की सूचना 3 कार्य दिवसों के भीतर देने पर ग्राहक की वैधानिक देनदारी पूर्णतः 'शून्य' होती है। बैंकों को 10 दिनों में विवादित राशि का अस्थायी रिफंड ('शैडो क्रेडिट') देना अनिवार्य है और जांच के दौरान कोई ब्याज नहीं लगाया जा सकता।

यह क्या है

क्रेडिट कार्ड धोखाधड़ी में कार्डधारक की सहमति के बिना क्रेडिट कार्ड नंबर, सीवीवी या क्रेडेंशियल का उपयोग करके किया गया कोई भी अनधिकृत या धोखाधड़ी वाला लेनदेन शामिल है। मुख्य प्रकारों में शामिल हैं: (1) अंतर्राष्ट्रीय बिना-ओटीपी लेनदेन (CNP Fraud) जहाँ विदेशी वेबसाइटों पर बिना 3D-सक्योर ओटीपी के कार्ड नंबर से खरीदारी कर ली जाती है। (2) पीओएस स्किमिंग एवं कार्ड क्लोनिंग जहाँ एटीएम या पीओएस मशीनों में छिपे स्कैनर से कार्ड की मैग्नेटिक स्ट्रिप का डेटा चुराकर डुप्लीकेट कार्ड बना लिया जाता है। (3) फ़िशिंग कॉल (Vishing) जहाँ रिवॉर्ड पॉइंट या लिमिट बढ़ाने के नाम पर सीवीवी और ओटीपी चुरा लिया जाता है। (4) मर्चेंट बिलिंग विवाद और अनधिकृत आवर्ती (recurring) ऑटो-डेबिट शुल्क। (5) जाली पहचान पत्रों (आधार/पैन) के आधार पर फर्जी क्रेडिट कार्ड बनवाना।

इसका उपयोग कब करें

यदि आपको किसी अनधिकृत क्रेडिट कार्ड कटौती का एसएमएस/ईमेल अलर्ट मिलता है, आपके मासिक कार्ड स्टेटमेंट में कोई अज्ञात लेनदेन दिखाई देता है, आपका भौतिक कार्ड खो जाता है/चोरी हो जाता है, या आपका बैंक (SBI, HDFC, ICICI, Axis आदि) धोखाधड़ी शुल्क वापस करने से इनकार करता है, तो तुरंत इस गाइड का उपयोग करें।

चरण-दर-चरण प्रक्रिया

  1. 1चरण 1: क्रेडिट कार्ड तुरंत ब्लॉक करें और कार्ड कंट्रोल बंद करें। तुरंत अपने बैंक के मोबाइल ऐप में जाएं। क्रेडिट कार्ड को स्थायी/अस्थायी रूप से ब्लॉक करें। कार्ड सेटिंग्स में जाकर 'International Transactions', 'Online E-Commerce' और 'Tap & Pay' को तुरंत ऑफ (OFF) कर दें।
  2. 2चरण 2: राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 और बैंक फ्रॉड हॉटलाइन पर कॉल करें। घटना को राष्ट्रीय पोर्टल पर दर्ज कराने के लिए 1930 पर कॉल करें। साथ ही अपने बैंक के 24x7 इमरजेंसी फ्रॉड हेल्पलाइन पर कॉल करके आधिकारिक शिकायत टिकट नंबर प्राप्त करें।
  3. 3चरण 3: बैंक का आधिकारिक क्रेडिट कार्ड चार्जबैक / डिस्प्यूट फॉर्म डाउनलोड करें। अपने कार्ड जारीकर्ता बैंक की वेबसाइट से आधिकारिक विवाद फॉर्म डाउनलोड करें। कार्ड नंबर, लेनदेन की तारीख, राशि, और मर्चेंट का नाम भरें तथा 'अनधिकृत लेनदेन' विकल्प पर टिक करें।
  4. 4चरण 4: cybercrime.gov.in पर आधिकारिक साइबर शिकायत दर्ज करें। cybercrime.gov.in पर लॉगिन करें, 'Report Financial Fraud' चुनें, विवरण दर्ज करें, एसएमएस स्क्रीनशॉट अपलोड करें और 15-अंकों का पावती नंबर (Acknowledgement Number) प्राप्त करें।
  5. 5चरण 5: बैंक विवाद विभाग को दस्तावेज भेजें। हस्ताक्षरित चार्जबैक फॉर्म, क्रेडिट कार्ड स्टेटमेंट, कार्ड की प्रति (केवल सामने का हिस्सा, सीवीवी ढककर) और साइबर पावती पीडीएफ को बैंक के फ्रॉड/चार्जबैक सेल को ईमेल करें।
  6. 6चरण 6: 10-दिवसीय शैडो क्रेडिट (Shadow Credit) नियम को ट्रैक करें। आरबीआई नियमों के अनुसार, लिखित विवाद फॉर्म जमा करने के 10 कार्य दिवसों के भीतर बैंक को विवादित राशि का अस्थायी क्रेडिट (Shadow Credit) देना अनिवार्य है और उस राशि पर ब्याज या विलंब शुल्क लगाना प्रतिबंधित है।
  7. 7चरण 7: आरबीआई लोकपाल cms.rbi.org.in पर अपील दर्ज करें। यदि बैंक 30 दिनों में धोखाधड़ी राशि वापस नहीं करता है या ग्राहक की लापरवाही न होने के बावजूद चार्जबैक खारिज करता है, तो cms.rbi.org.in पर आरबीआई लोकपाल के पास शिकायत दर्ज कराएं।

आवश्यक दस्तावेज़

  • बैंक का आधिकारिक हस्ताक्षरित क्रेडिट कार्ड लेनदेन विवाद / चार्जबैक घोषणा फॉर्म
  • क्रेडिट कार्ड का मासिक ई-स्टेटमेंट (पीडीएफ) जिसमें अनधिकृत लेनदेन हाइलाइट किया गया हो
  • कटौती के समय और मर्चेंट का नाम दर्शाने वाले अनधिकृत एसएमएस अलर्ट के स्क्रीनशॉट
  • cybercrime.gov.in से प्राप्त 15-अंकों का साइबर शिकायत पावती पीडीएफ
  • भौतिक क्रेडिट कार्ड की फोटोकॉपी (केवल सामने का हिस्सा — पीछे का सीवीवी नंबर कभी स्कैन न करें)
  • पासपोर्ट/यात्रा का साक्ष्य (अंतर्राष्ट्रीय लेनदेन के मामलों में यह साबित करने के लिए कि आप भारत में ही थे)

शुल्क

निःशुल्क। कार्ड ब्लॉक करने, बैंक में चार्जबैक फॉर्म भरने, साइबर पोर्टल रिपोर्ट दर्ज करने या आरबीआई लोकपाल के पास जाने का कोई शुल्क नहीं है।

प्रोसेसिंग समय

कार्ड कुछ ही सेकंडों में तुरंत ब्लॉक हो जाता है। आरबीआई नियमों के अनुसार 10 दिनों में अस्थायी शैडो क्रेडिट मिलता है। वीजा/मास्टरकार्ड द्वारा स्थायी चार्जबैक जांच में 30 से 60 दिन लगते हैं।

महत्वपूर्ण सुझाव

  • अपने बैंक ऐप में 'International Usage' को हमेशा डिफ़ॉल्ट रूप से बंद (OFF) रखें; केवल विदेश यात्रा के समय ही इसे चालू करें।
  • अपने क्रेडिट कार्ड ऐप में प्रति लेनदेन अधिकतम सीमा (जैसे ₹5,000) निर्धारित करें।
  • वार्षिक शुल्क माफ करने या कार्ड लिमिट बढ़ाने का दावा करने वाली कॉलों पर कभी भी सीवीवी, एक्सपायरी डेट या ओटीपी साझा न करें।
  • एटीएम या पीओएस मशीन में कार्ड डालने से पहले कार्ड स्लॉट को हिलाकर देख लें कि कहीं कोई डुप्लीकेट स्किमर मशीन तो नहीं लगी है।
  • हर महीने अपने क्रेडिट कार्ड स्टेटमेंट की जांच करें ताकि छोटे परीक्षण लेनदेन (जैसे ₹50 या $1) का तुरंत पता चल सके।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आरबीआई ग्राहक सुरक्षा निर्देशों के अनुसार, जब कार्डधारक अनधिकृत लेनदेन के लिए लिखित चार्जबैक फॉर्म जमा करता है, तो बैंक को 10 कार्य दिवसों के भीतर विवादित राशि का अस्थायी रिफंड ('शैडो क्रेडिट') देना अनिवार्य है। साथ ही, जांच लंबित रहने तक बैंक उस राशि पर कोई ब्याज या जुर्माना नहीं लगा सकता।
हां। भारत में आरबीआई सभी घरेलू भुगतानों के लिए 2FA/ओटीपी अनिवार्य करता है। विदेशी वेबसाइटों पर बिना ओटीपी के भुगतान संसाधित होता है। यदि आपके कार्ड का दुरुपयोग किसी अंतरराष्ट्रीय साइट पर होता है, तो 3 कार्य दिवसों के भीतर रिपोर्ट करने और भौतिक कार्ड अपने पास होने की पुष्टि करने पर ग्राहक की देनदारी पूर्णतः 'शून्य' होती है।
आरबीआई 2017 सर्कुलर के अनुसार: (1) 3 कार्य दिवसों के भीतर रिपोर्ट करने पर 100% रिफंड (शून्य देनदारी) मिलता है। (2) 4 से 7 दिनों में रिपोर्ट करने पर देनदारी सीमित (अधिकतम ₹10,000 या ₹25,000) होती है। (3) 7 दिनों के बाद रिपोर्ट करने पर रिफंड बैंक की बोर्ड नीति पर निर्भर करता है।
कार्ड स्किमिंग तब होती है जब स्कैमर एटीएम या पीओएस मशीन पर कार्ड डेटा और पिन चुराने के लिए एक माइक्रो जासूस रीडर लगा देते हैं। इससे बचने के लिए: कार्ड स्लॉट को हिलाकर देखें कि वह ढीला तो नहीं है, और पिन दर्ज करते समय कीपैड को हाथ से ढकें।
आरबीआई मास्टर निर्देश स्पष्ट रूप से बैंकों को विवादित अनधिकृत लेनदेन पर ब्याज या लेट फीस लगाने से रोकते हैं। बैंक के प्रधान नोडल अधिकारी (PNO) को लिखित शिकायत भेजें। यदि बैंक शुल्क नहीं हटाता है, तो cms.rbi.org.in पर आरबीआई लोकपाल के पास शिकायत दर्ज कराएं।
यदि आपने कॉल पर ओटीपी या सीवीवी बता दिया है, तो तुरंत अपने बैंक की इमरजेंसी हेल्पलाइन पर कॉल करके कार्ड और ऐप को ब्लॉक करें। 1930 पर तुरंत रिपोर्ट करने से पुलिस स्कैमर के मर्चेंट खाते को फ्रीज कर सकती है।
क्रेडिट कार्ड फ्रॉड चार्जबैक तब होता है जब किसी तीसरे पक्ष ने आपकी जानकारी के बिना अनधिकृत खरीदारी की हो। मर्चेंट बिलिंग विवाद तब होता है जब आपने स्वयं खरीदारी की थी लेकिन मर्चेंट ने खराब सामान भेजा या गलत बिल काटा। मर्चेंट विवाद वीजा/मास्टरकार्ड मध्यस्थता नियमों से हल होते हैं।
आरबीआई नियमों के तहत, विवादित धोखाधड़ी राशि की जांच लंबित रहने के दौरान बैंक क्रेडिट ब्यूरो (CIBIL) को प्रतिकूल डिफॉल्टर के रूप में रिपोर्ट नहीं कर सकते। यदि इस कारण CIBIL स्कोर गिरा है, तो cibil.com पर बैंक चार्जबैक पत्र के साथ सुधार की मांग करें।
वीजा, मास्टरकार्ड और रुपे (RuPay) नियमों के अनुसार 10 दिनों में अस्थायी शैडो क्रेडिट दिया जाता है। मर्चेंट बैंक के पास साक्ष्य देने के लिए 30 दिन होते हैं। यदि मर्चेंट ओटीपी प्रमाणीकरण का प्रमाण नहीं दे पाता, तो 45 से 60 दिनों में चार्जबैक स्थायी हो जाता है।
यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है और कानूनी सलाह नहीं है। कार्रवाई करने से पहले हमेशा आधिकारिक स्रोत से पुष्टि करें।