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तथ्य जांचा गयाअंतिम अपडेट: 21 जुलाई 2026समीक्षक: ComplaintAdda Editorial & Research Desk

ऑनलाइन शॉपिंग धोखाधड़ी एवं ई-कॉमर्स शिकायत गाइड

भारत में ऑनलाइन शॉपिंग के प्रसार के साथ ही लाखों उपभोक्ता धोखाधड़ी, नकली सामान मिलने, खाली डिब्बे की डिलीवरी, और रिटर्न/रिफंड खारिज होने जैसी समस्याओं का शिकार हो रहे हैं। भारत में ऑनलाइन खरीदारी को उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 और उपभोक्ता संरक्षण (ई-कॉमर्स) नियम, 2020 द्वारा नियंत्रित किया जाता है। इन वैधानिक नियमों के तहत हर ई-कॉमर्स कंपनी—चाहे वह मार्केटप्लेस (जैसे Amazon, Flipkart, Meesho) हो या ब्रांड वेबसाइट—दोषपूर्ण उत्पादों, भ्रामक विज्ञापनों और रिफंड में देरी के लिए कानूनी रूप से जवाबदेह है। यदि कोई प्लेटफॉर्म या सेलर आपका रिफंड रोकता है या खाली डिब्बा भेजता है, तो उपभोक्ताओं के पास राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (NCH 1915) पर शिकायत करने, साइबर पोर्टल (1930) पर फर्जी वेबसाइटों की रिपोर्ट दर्ज करने और ई-दाखिल पोर्टल (edaakhil.nic.in) के माध्यम से उपभोक्ता फोरम में मामला दर्ज करने का कानूनी अधिकार है।

विषय विशेषज्ञ सलाह एवं महत्वपूर्ण बारीकियां

महंगे ऑनलाइन पैकेज खोलते समय हमेशा एक निरंतर अनकट अनबॉक्सिंग वीडियो जरूर बनाएं। ई-कॉमर्स नियम 2020 के तहत ग्रीवेंस ऑफिसर को 48 घंटे में पावती और 30 दिनों में विवाद का समाधान करना अनिवार्य है। राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (1915) के जरिए 85% से अधिक ई-कॉमर्स रिफंड बिना वकील के मिल जाते हैं।

यह क्या है

ऑनलाइन शॉपिंग धोखाधड़ी में कई प्रकार की कपटपूर्ण गतिविधियां शामिल हैं: (1) खाली डिब्बा स्कैम जहाँ महंगे फोन या लैपटॉप के स्थान पर साबुन की टिकिया या पत्थर का टुकड़ा पैक करके डिलीवर कर दिया जाता है। (2) नकली उत्पाद बेचना जहाँ प्रसिद्ध ब्रांडों के नाम पर जाली और खराब सामान बेचा जाता है। (3) रिटर्न/रिफंड से मनमाना इनकार करना जहाँ 'टैग गायब है' या 'ग्राहक द्वारा क्षतिग्रस्त' का झूठा बहाना बनाकर रिफंड खारिज कर दिया जाता है। (4) फर्जी वेबसाइट स्कैम जहाँ इंस्टाग्राम/फेसबुक विज्ञापनों के जरिए एडवांस पैसे लेकर सामान डिलीवर नहीं किया जाता और साइट बंद कर दी जाती है। (5) छिपा हुआ शुल्क (Dark Patterns) जहाँ चेकआउट पर अप्रकटित हैंडलिंग चार्ज जोड़े जाते हैं। (6) सेलर की पहचान और मूल देश (Country of Origin) छिपाना जहाँ ई-कॉमर्स नियम 2020 के नियम 5 का उल्लंघन करके विक्रेता का पंजीकृत पता और विवरण नहीं दिखाया जाता।

इसका उपयोग कब करें

यदि आपको ऑनलाइन पोर्टल से खराब, गलत या नकली सामान मिला है, खाली डिब्बा प्राप्त हुआ है, ग्राहक सेवा ने रिटर्न विंडो के भीतर आपका वैध रिफंड खारिज कर दिया है, या इंस्टाग्राम/व्हाट्सएप पर फर्जी स्टोर द्वारा धोखाधड़ी की गई है, तो तुरंत इस रिफंड गाइड का उपयोग करें।

चरण-दर-चरण प्रक्रिया

  1. 1चरण 1: अनबॉक्सिंग साक्ष्य रिकॉर्ड करें और ऐप में रिटर्न अनुरोध दर्ज करें। पार्सल मिलने पर डिलीवरी लेबल, बाहरी पैकेज और अंदर के सामान की स्पष्ट तस्वीरें लें। महंगे सामान का अनकट अनबॉक्सिंग वीडियो जरूर बनाएं। ऐप के भीतर रिटर्न विंडो (आमतौर पर 7-10 दिन) समाप्त होने से पहले रिटर्न अनुरोध दर्ज करें।
  2. 2चरण 2: ई-कॉमर्स ग्रीवेंस ऑफिसर (Grievance Officer) को ईमेल भेजें। यदि ग्राहक सेवा विवाद बंद कर देती है, तो प्लेटफॉर्म की वेबसाइट से ग्रीवेंस ऑफिसर का ईमेल निकालें। ई-कॉमर्स नियम 2020 के तहत उन्हें लिखित एस्केलेशन भेजें। कानूनन उन्हें 48 घंटे में पावती और 1 महीने में निवारण देना अनिवार्य है।
  3. 3चरण 3: राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (NCH 1915) पर शिकायत दर्ज कराएं। 1915 पर कॉल करें या consumerhelpline.gov.in (या NCH व्हाट्सएप 8800001915) पर पंजीकरण करें। ऑर्डर आईडी, चालान और ईमेल संवाद अपलोड करें। NCH सीधे कंपनी के नोडल अधिकारी को शिकायत भेजता है।
  4. 4चरण 4: फर्जी शॉपिंग वेबसाइटों के लिए साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करें। यदि इंस्टाग्राम/वेबसाइट ने पैसे लेकर सामान नहीं भेजा, तो तुरंत 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर रिपोर्ट दर्ज करें।
  5. 5चरण 5: कंपनी और सेलर के पंजीकृत मुख्यालय को 15-दिवसीय कानूनी नोटिस भेजें। उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 के तहत कानूनी नोटिस तैयार करें और इसे स्पीड पोस्ट (AD) द्वारा ई-कॉमर्स कंपनी और सेलर के कॉर्पोरेट पते पर भेजें।
  6. 6चरण 6: ई-दाखिल (edaakhil.nic.in) के माध्यम से उपभोक्ता फोरम में ऑनलाइन केस दर्ज करें। यदि 15 दिनों में रिफंड नहीं मिलता, तो edaakhil.nic.in पर लॉगिन करके बिना वकील के उपभोक्ता फोरम में मामला दर्ज करें और रिफंड, ब्याज व मानसिक उत्पीड़न के मुआवजे की मांग करें।

आवश्यक दस्तावेज़

  • आधिकारिक टैक्स इनवॉइस/बिल जिसमें ऑर्डर आईडी, सेलर का नाम, जीएसटी नंबर और राशि दर्ज हो
  • पार्सल खोलने (Unboxing) का बिना कट वाला वीडियो जिसमें शिपिंग लेबल और सामान साफ दिखे
  • दोषपूर्ण/गलत उत्पाद, पार्सल बॉक्स और कूरियर बारकोड (AWB) की स्पष्ट तस्वीरें
  • ग्राहक सेवा चैट, विवाद टिकट इतिहास और ग्रीवेंस ऑफिसर के साथ ईमेल पत्राचार के स्क्रीनशॉट
  • ई-कॉमर्स कंपनी को किए गए भुगतान का बैंक पासबुक/क्रेडिट कार्ड/यूपीआई स्टेटमेंट
  • 15-दिवसीय कानूनी नोटिस की प्रति और स्पीड पोस्ट रसीदें (उपभोक्ता अदालत में मामला दर्ज करते समय)

शुल्क

निःशुल्क से न्यूनतम। NCH 1915 या साइबर पोर्टल 1930 पर शिकायत दर्ज करना 100% निःशुल्क है। ई-दाखिल पोर्टल पर ₹5 लाख तक के दावों के लिए उपभोक्ता अदालत शुल्क पूरी तरह शून्य है।

प्रोसेसिंग समय

ई-कॉमर्स नियम 2020 के तहत ग्रीवेंस ऑफिसर को 30 दिनों में निवारण करना अनिवार्य है। NCH के जरिए 15 से 45 दिनों में रिफंड मिल जाता है। ई-दाखिल उपभोक्ता फोरम में फैसला आने में 90 से 180 दिन लगते हैं।

महत्वपूर्ण सुझाव

  • महंगे पार्सल (फोन, लैपटॉप) खोलते समय हमेशा एक निरंतर अनकट अनबॉक्सिंग वीडियो जरूर बनाएं; NCH और अदालतें इसे अकाट्य साक्ष्य मानती हैं।
  • खरीदारी करने से पहले मार्केटप्लेस पर सेलर का असली नाम, पता, रेटिंग और मूल देश (Country of Origin) जांचें; इसे न दिखाना ई-कॉमर्स नियम 2020 के नियम 5 का उल्लंघन है।
  • ई-कॉमर्स नियमों के नियम 4(9) के तहत, भुगतान के बाद कोई भी प्लेटफॉर्म बिना समान मुआवजा दिए एकतरफा ऑर्डर रद्द नहीं कर सकता या मनमाना रद्दीकरण शुल्क नहीं लगा सकता।
  • बिना वेबसाइट या जीएसटी बिल के सीधे बैंक/यूपीआई ट्रांसफर मांगने वाले इंस्टाग्राम/फेसबुक पेजों से खरीदारी से बचें।
  • यदि डिलीवरी एजेंट आपको क्षतिग्रस्त या खुला हुआ डिब्बा दे, तो डिलीवरी लेने से इंकार कर दें और रसीद पर 'Tampered - Refused' लिखें।
  • ग्रीवेंस ऑफिसर को ईमेल लिखते समय 'उपभोक्ता संरक्षण (ई-कॉमर्स) नियम, 2020' का उल्लेख जरूर करें ताकि वे मामले को गंभीरता से लें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उपभोक्ता संरक्षण (ई-कॉमर्स) नियम, 2020 के तहत हर ई-कॉमर्स कंपनी को: (1) ग्रीवेंस ऑफिसर का नाम, पता व ईमेल पोर्टल पर स्पष्ट दिखाना होगा। (2) हर शिकायत को 48 घंटों में स्वीकार और 30 दिनों में हल करना होगा। (3) मार्केटप्लेस सेलर्स का असली नाम, पता और देश (Country of Origin) दिखाना होगा। (4) खराब या गलत सामान डिलीवर होने पर रिटर्न लेना और रिफंड देना अनिवार्य है।
तुरंत डिब्बे, शिपिंग लेबल और कूरियर सील के फोटो खींचें। अनबॉक्सिंग वीडियो को ग्रीवेंस ऑफिसर को ईमेल करें। NCH 1915 पर शिकायत दर्ज करें। यदि महंगे सामान पर प्लेटफॉर्म रिफंड से मना करे, तो बीएनएस धारा 316 के तहत पुलिस में आपराधिक शिकायत दर्ज कराएं और ई-दाखिल पोर्टल पर केस दायर करें।
नहीं। प्लेटफॉर्म बिना तकनीकी जांच रिपोर्ट के मनमाने ढंग से ग्राहक पर दोष मढ़कर रिटर्न खारिज नहीं कर सकते। यदि आपके पास अनबॉक्सिंग साक्ष्य है जो दिखाता है कि सामान डिलीवरी के समय ही खराब था, तो प्लेटफॉर्म को रिफंड देना होगा। NCH 1915 में इसकी रिपोर्ट करें।
उपभोक्ता संरक्षण (ई-कॉमर्स) नियम 2020 के नियम 3(1)(b) के तहत इंस्टाग्राम, फेसबुक या व्हाट्सएप पर बिक्री करने वाले विक्रेता कानूनी रूप से 'ई-कॉमर्स इकाई' के अंतर्गत आते हैं और रिटर्न नियमों का पालन करने के लिए बाध्य हैं। यदि वे पैसे लेकर सामान नहीं भेजते, तो तुरंत 1930 पर कॉल करके बैंक खाता फ्रीज कराएं, cybercrime.gov.in पर रिपोर्ट करें और संचार साथी चक्षु पोर्टल (sancharsaathi.gov.in) पर शिकायत करें।
हां। यद्यपि मार्केटप्लेस आईटी अधिनियम, 2000 की धारा 79 के तहत बिचौलिया (Intermediary) होने का दावा करते हैं, यह कानूनी छूट ई-कॉमर्स नियम 2020 के नियम 5 के तहत सशर्त है। मार्केटप्लेस को सेलर के विवरण का सत्यापन करना और उनका पता दिखाना अनिवार्य है। यदि सेलर गायब हो जाता है या प्लेटफॉर्म सेलर का सत्यापन करने में विफल रहता है, तो उपभोक्ता को रिफंड देने की वैधानिक जिम्मेदारी मार्केटप्लेस की होती है।
डार्क पैटर्न वेबसाइट डिजाइनों की वे कपटपूर्ण तकनीकें हैं जिनसे उपभोक्ताओं से धोखे से अतिरिक्त पैसे खर्च करवा लिए जाते हैं (जैसे चेकआउट पर छिपा हुआ शुल्क जोड़ना या फर्जी टाइमर दिखाना)। 30 नवंबर 2023 को CCPA ने 13 डार्क पैटर्नों को पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया है। उपभोक्ता ccpa-complain@gov.in पर सीधे ईमेल करके डार्क पैटर्न की शिकायत दर्ज करा सकते हैं। CCPA को ₹10 लाख तक का जुर्माना लगाने और सुधारात्मक आदेश देने का वैधानिक अधिकार है।
edaakhil.nic.in पर जाएं और अकाउंट बनाएं। अपने आवासीय पते के आधार पर जिला उपभोक्ता आयोग चुनें। याचिका पीडीएफ, इनवॉइस बिल, अनबॉक्सिंग फोटो और 15-दिवसीय कानूनी नोटिस की रसीद अपलोड करें। ₹5 लाख तक के दावों पर कोई शुल्क नहीं लगता। आयोग कंपनी को ऑनलाइन समन जारी करेगा।
24 घंटे के भीतर ऐप पर 'Wrong Delivery Status' का विवाद दर्ज करें। कंपनी से डिलीवरी बॉय के जीपीएस लोकेशन और डिलीवरी ओटीपी (OTP) का प्रमाण मांगें। यदि कंपनी डिलीवरी ओटीपी का प्रमाण नहीं दे पाती, तो धोखाधड़ी से ऑर्डर बंद करने के लिए NCH 1915 पर शिकायत दर्ज करें।
हां। उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 की धारा 39 के तहत उपभोक्ता फोरम नियमित रूप से मानसिक उत्पीड़न का मुआवजा (₹5,000 से ₹50,000 या अधिक), रिफंड राशि पर 9% से 18% सालाना ब्याज और कानूनी खर्च का भुगतान करने का आदेश देते हैं।
उपभोक्ता संरक्षण (ई-कॉमर्स) नियम, 2020 के नियम 4(9) के तहत, कोई भी ई-कॉमर्स कंपनी उपभोक्ता पर रद्दीकरण शुल्क तब तक नहीं लगा सकती जब तक कि कंपनी द्वारा खुद ऑर्डर रद्द करने पर भी उपभोक्ता को उतना ही मुआवजा न दिया जाए। उपभोक्ताओं से मनमाना रद्दीकरण शुल्क वसूलना कानूनन अवैध है।

संपादकीय एवं अनुसंधान उत्तरदायित्व

यह गाइड सुमित तिवारी (संस्थापक एवं मुख्य संपादक) के निर्देशन में ComplaintAdda संपादकीय एवं अनुसंधान डेस्क द्वारा तैयार और सत्यापित की गई है। सभी वैधानिक प्रक्रियाएं, आधिकारिक पोर्टल लिंक और हेल्पलाइन नंबर सीधे सरकारी राजपत्रों, नियामक परिपत्रों (RBI, TRAI, CCPA, EPFO) और आधिकारिक पोर्टलों (.gov.in) से सत्यापित किए जाते हैं।

यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है और कानूनी सलाह नहीं है। कार्रवाई करने से पहले हमेशा आधिकारिक स्रोत से पुष्टि करें।