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तथ्य जांचा गयाअंतिम अपडेट: 21 जुलाई 2026समीक्षक: ComplaintAdda E-Commerce & Consumer Rights Legal Cell

ई-कॉमर्स रिफंड न मिलने एवं ऑनलाइन शॉपिंग रिटर्न कानूनी समाधान गाइड

भारत में 25 करोड़ से अधिक ऑनलाइन खरीदारों के साथ, ई-कॉमर्स रिफंड न मिलना और रिटर्न विवाद सबसे अधिक दर्ज होने वाली शिकायतें बन चुके हैं। ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म्स (जैसे फ्लिपकार्ट, अमेजन, मीशो, मिंत्रा) और D2C ब्रांड्स अक्सर रिफंड अटकाने के गैर-कानूनी हथकंडे अपनाते हैं: सामान कूरियर द्वारा ले जाने के हफ्तों बाद भी पैसे न देना, सेलर द्वारा 'गलत या इस्तेमाल किया गया सामान मिला' का झूठा आरोप लगाकर रिफंड रद्द करना, बैंक खाते की जगह अपने ऐप वॉलेट/गिफ्ट कार्ड में जबरन पैसे डालना, और कस्टमर केयर टिकट बंद कर देना। इस मनमानी को रोकने के लिए सरकार ने उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 के तहत **उपभोक्ता संरक्षण (ई-कॉमर्स) नियम, 2020** लागू किए हैं। इन वैधानिक नियमों के अनुसार: (1) ई-कॉमर्स कंपनियों को **48 घंटों** में शिकायत स्वीकार करनी होगी और **1 महीने** में विवाद का पूर्ण समाधान करना अनिवार्य है। (2) नियम 6(3)(h) के तहत ग्राहक को उसकी इच्छा के बिना वॉलेट क्रेडिट या कूपन देना और मनमाना कैंसिलेशन चार्ज लगाना पूरी तरह गैर-कानूनी है। (3) **आरबीआई टर्नअराउंड टाइम (TAT) नियम 2019** के तहत तय सीमा (T+1 से T+5 दिन) से अधिक देरी होने पर बैंक/प्लेटफॉर्म को **₹100 प्रतिदिन के हिसाब से पेनल्टी हर्जाना** उपभोक्ता के खाते में जमा करना होगा। ग्राहक **राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (1915)** या e-Daakhil पर तुरंत कार्रवाई करा सकते हैं।

विषय विशेषज्ञ सलाह एवं महत्वपूर्ण बारीकियां

ई-कॉमर्स नियम 2020 और आरबीआई नियम 2019 के तहत जबरन वॉलेट रिफंड गैर-कानूनी है, 48 घंटे में ग्रीवेंस रिस्पॉन्स अनिवार्य है और रिफंड में देरी पर ₹100/दिन का पेनल्टी हर्जाना देय है।

यह क्या है

ई-कॉमर्स रिफंड विवादों में ई-कॉमर्स नियम 2020 और आरबीआई भुगतान निर्देशों के वैधानिक उल्लंघन शामिल हैं। मुख्य वैधानिक स्तंभ: (1) मूल भुगतान माध्यम में रिफंड का नियम (Rule 6(3)(h)): ग्राहक की स्पष्ट सहमति के बिना कंपनी अपने वॉलेट या गिफ्ट कार्ड में पैसे नहीं डाल सकती; रिफंड सीधे मूल बैंक खाते/यूपीआई में ही भेजना अनिवार्य है। (2) पिकअप रसीद व जोखिम हस्तांतरण: कूरियर एजेंट द्वारा दरवाजे पर सामान पिकअप करते ही पार्सल का जोखिम ई-कॉमर्स कंपनी पर चला जाता है। सेलर बाद में गोदाम में 'गलत सामान' का बहाना बनाकर रिफंड रद्द नहीं कर सकता। (3) एकतरफा कैंसिलेशन फीस पर रोक: यदि सेलर द्वारा ऑर्डर रद्द करने पर ग्राहक को हर्जाना नहीं मिलता, तो कंपनी ग्राहक पर भी कैंसिलेशन चार्ज नहीं थोप सकती। (4) आरबीआई TAT पेनल्टी हर्जाना (₹100/दिन): पेमेंट फेल या रिफंड में तय दिनों (T+1 से T+5) से अधिक देरी पर ₹100 प्रतिदिन के हिसाब से पेनल्टी हर्जाना देय है।

इसका उपयोग कब करें

यदि ई-कॉमर्स ऐप सामान पिकअप होने के 7 दिनों बाद भी रिफंड न दे, पेमेंट फेल होने पर कटे पैसे वापस न करे, बैंक खाते के स्थान पर वॉलेट क्रेडिट थोपे, या सेलर द्वारा फर्जी गलत सामान मिलने का रिजेक्शन दिखाए, तो तुरंत इस गाइड का उपयोग करें।

चरण-दर-चरण प्रक्रिया

  1. 1चरण 1: ग्राहक सेवा से 23-अंकों का बैंक ARN / RRN / UTR नंबर मांगें। ई-कॉमर्स कस्टमर सपोर्ट से बात कर आधिकारिक 23-अंकों का Acquirer Reference Number (ARN) या UTR नंबर मांगें जो यह सिद्ध करे कि रिफंड बैंक को भेजा जा चुका है।
  2. 2चरण 2: अपने बैंक से ARN नंबर ट्रैक कराएं। यह 23-अंकों का ARN/UTR नंबर अपने बैंक (SBI, HDFC, ICICI) के कस्टमर केयर को दें और जांचें कि क्या रिफंड क्लीयरिंग लॉग्स में अटका हुआ है।
  3. 3चरण 3: कंपनी के नोडल/ग्रीवेंस ऑफिसर (Grievance Officer) को लीगल ईमेल भेजें। 7 दिनों में रिफंड न आने पर कंपनी की वेबसाइट पर दिए ग्रीवेंस ऑफिसर को ईमेल भेजें। इसमें ऑर्डर बिल, पिकअप रसीद और बैंक स्टेटमेंट लगाएं। ई-कॉमर्स नियम 2020 की धारा 4(8) का हवाला दें। ग्रीवेंस ऑफिसर को 48 घंटों में जवाब देना अनिवार्य है।
  4. 4चरण 4: राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (NCH 1915 व consumerhelpline.gov.in) पर रिपोर्ट करें। 7 दिनों में समाधान न होने पर 1915 पर कॉल करें या consumerhelpline.gov.in पर शिकायत दर्ज करें। ऑर्डर प्रति, पिकअप पर्ची फोटो और बैंक स्टेटमेंट अपलोड करें। NCH डॉकेट नंबर जारी कर कंपनी को नोटिस भेजता है।
  5. 5चरण 5: सीसीपीए (CCPA) व आरबीआई ओम्बड्समैन को रिपोर्ट करें। फर्जी शॉपिंग वेबसाइट या जबरन वॉलेट में रिफंड डालने पर केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) में शिकायत करें। फेल ट्रांजैक्शन का रिफंड न मिलने पर cms.rbi.org.in पर आरबीआई ओम्बड्समैन को रिपोर्ट करें।
  6. 6चरण 6: ई-दाखिल (edaakhil.nic.in) पर उपभोक्ता कोर्ट केस दर्ज करें। महंगे सामान (लैपटॉप, मोबाइल, ज्वैलरी) का रिफंड अटकाने पर e-Daakhil पर जिला उपभोक्ता आयोग में केस दर्ज कराएं और पूरा रिफंड मय ₹100/दिन पेनल्टी हर्जाना मांगें।

आवश्यक दस्तावेज़

  • आधिकारिक ऑर्डर चालान (Invoice PDF) जिसमें ऑर्डर आईडी, सेलर का नाम, कीमत और डिलीवरी पता दर्ज हो
  • कूरियर रिटर्न पिकअप रसीद / फिजिकल रसीद / डोरस्टेप स्कैनिंग मैसेज फोटो (रिटर्न का मुख्य वैधानिक सबूत)
  • ऐप/वेबसाइट से ऑर्डर कैंसिल होने या रिटर्न स्वीकृत होने का स्क्रीनशॉट
  • बैंक अकाउंट / क्रेडिट कार्ड / यूपीआई स्टेटमेंट (जिसमें कटे हुए पैसे दिखे और रिफंड न आने का प्रमाण हो)
  • 23-अंकों की Acquirer Reference Number (ARN/UTR) रिफंड रसीद (यदि कंपनी द्वारा जारी की गई हो)
  • ग्रीवेंस ऑफिसर को भेजे गए ईमेल की प्रति और राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (NCH) डॉकेट पावती

शुल्क

100% निःशुल्क। राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (1915), CCPA पोर्टल, या बैंक चार्जबैक/आरबीआई ओम्बड्समैन पर रिफंड शिकायत दर्ज करने का कोई शुल्क नहीं लगता।

प्रोसेसिंग समय

ग्रीवेंस ऑफिसर को 48 घंटों में जवाब और 30 दिनों में समाधान देना अनिवार्य है। यूपीआई/डेबिट कार्ड रिफंड 2-4 दिन और क्रेडिट कार्ड रिफंड 5-7 दिनों में खाते में आता है।

महत्वपूर्ण सुझाव

  • कूरियर पिकअप का फोटो व वीडियो रिकॉर्ड बनाएं: कूरियर एजेंट को पार्सल सौंपते समय बक्से के अंदर रखे सामान का फोटो/वीडियो कूरियर एजेंट के साथ लें—इससे सेलर का 'गलत सामान मिला' का फर्जी बहाना पूरी तरह खारिज हो जाएगा।
  • कागजी पिकअप रसीद संभाल कर रखें: कूरियर एजेंट द्वारा दी गई फिजिकल पिकअप रसीद को बैंक में पैसे आने तक संभाल कर रखें—यह कानूनी रूप से वापसी का एकमात्र अकाट्य सबूत है।
  • जबरन ऐप वॉलेट या कूरियर कूपन रिफंड को खारिज करें: ई-कॉमर्स नियम 2020 की धारा 6(3)(h) का हवाला देकर कंपनी को ईमेल भेजें और सीधे बैंक खाते/यूपीआई में ही पैसे ट्रांसफर करने की मांग करें।
  • आरबीआई ₹100/दिन पेनल्टी हर्जाने का दावा करें: आरबीआई टर्नअराउंड नियम 2019 के तहत रिफंड में तय दिनों (T+1 से T+5) से अधिक देरी होने पर प्रति दिन ₹100 मुआवजे की मांग करें।
  • महंगे सामान की अनबॉक्सिंग वीडियो बनाएं: मोबाइल, लैपटॉप का रिप्लेसमेंट पार्सल खोलते समय शिपिंग लेबल से लेकर बक्सा खोलने तक का बिना रुकावट वाला अनबॉक्सिंग वीडियो अवश्य बनाएं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ई-कॉमर्स नियम 2020 के अनुसार: (1) कंपनियों को 48 घंटों में शिकायत स्वीकार कर 30 दिनों में विवाद हल करना होगा। (2) नियम 6(3)(h) के तहत बैंक खाते के बजाय जबरन वॉलेट क्रेडिट या कूपन देना प्रतिबंधित है। (3) एकतरफा कैंसिलेशन चार्ज लगाना पूरी तरह गैर-कानूनी है।
ARN या UTR एक 23-अंकों का इलेक्ट्रॉनिक ट्रैकिंग नंबर है जो मर्चेंट पेमेंट गेटवे द्वारा बैंक नेटवर्क को रिफंड जारी करते समय बनता है। यह नंबर अपने बैंक को देने पर अटका हुआ पैसा तुरंत खाते में क्रेडिट हो जाता है। यदि कंपनी ARN नंबर न दे सके, तो इसका मतलब है कि रिफंड भेजा ही नहीं गया था।
आरबीआई सर्कुलर 2019-20 के अनुसार: यदि पेमेंट फेल होने पर कटा पैसा या रिफंड तय समयसीमा (T+1 से T+5 दिन) के भीतर ग्राहक के खाते में वापस नहीं आता, तो बैंक/सिस्टम प्रदाता को ₹100 प्रति दिन के हिसाब से पेनल्टी हर्जाना सीधे ग्राहक के खाते में जमा करना होगा।
यह सेलर का आम फर्जी बहाना है। तुरंत ये कदम उठाएं: (1) कूरियर पिकअप रसीद और पिकअप फोटो/वीडियो पेश करें। (2) NCH 1915 पर रिपोर्ट करें कि कूरियर द्वारा पिकअप करते ही जोखिम कंपनी पर चला गया था। (3) CCPA पोर्टल पर अनफेयर ट्रेड प्रैक्टिस की रिपोर्ट दर्ज करें।
जी नहीं। यदि मूल उत्पाद, सीरियल नंबर और टैग सही-सलामत हैं, तो केवल गत्ते का बाहरी बक्सा न होने के आधार पर कंपनी कानूनी रूप से रिफंड नहीं रोक सकती। डिफेक्टिव या गलत सामान पर पैकेजिंग का बहाना बनाना सेवा में कमी (Service Deficiency) है।
जी नहीं। ई-कॉमर्स नियम 2020 की धारा 6(3)(h) के तहत ग्राहक की इच्छा के खिलाफ ऐप वॉलेट, रिवॉर्ड पॉइंट या कूपन में रिफंड देना पूरी तरह गैर-कानूनी है। ग्राहक सीधे अपने मूल बैंक खाते/कार्ड में ही रिफंड पाने का पूर्ण कानूनी हक रखता है।
यदि कोई फर्जी वेबसाइट पैसे लेकर सामान न भेजे और रिफंड न दे, तो तुरंत: (1) राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल (cybercrime.gov.in / 1930) पर रिपोर्ट करें। (2) अपने बैंक में 'Merchant Fraud Chargeback' फाइल करें। (3) केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) को शिकायत भेजें।
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 की धारा 69 के अनुसार रिटर्न पिकअप होने या रिफंड की तय सीमा बीतने की तारीख से दो (2) वर्षों के भीतर e-Daakhil पर केस दर्ज करना अनिवार्य है।
जी नहीं। ई-कॉमर्स नियमों के अनुसार यदि सेलर द्वारा ऑर्डर रद्द करने पर ग्राहक को मुआवजा नहीं मिलता, तो कंपनी भी ग्राहक से कोई भी रद्दीकरण शुल्क (Cancellation Fee) नहीं काट सकती। 100% पूरा रिफंड करना अनिवार्य है।
यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है और कानूनी सलाह नहीं है। कार्रवाई करने से पहले हमेशा आधिकारिक स्रोत से पुष्टि करें।