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तथ्य जांचा गयाअंतिम अपडेट: 21 जुलाई 2026समीक्षक: ComplaintAdda Legal Affairs Desk

एफआईआर (प्रथम सूचना रिपोर्ट) एवं बीएनएसएस धारा 173 गाइड

प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) संज्ञेय अपराध (जैसे चोरी, डकैती, बलात्कार, साइबर फ्रॉड, हत्या या अपहरण) की सूचना मिलने पर पुलिस द्वारा तैयार किया जाने वाला प्राथमिक वैधानिक दस्तावेज है। 1 जुलाई 2024 से पूरे भारत में पुराना दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC 1973) समाप्त कर **भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) 2023** लागू कर दिया गया है। **BNSS 2023 की धारा 173** (जो पुरानी CrPC धारा 154 की जगह लेती है) के तहत संज्ञेय अपराध के लिए एफआईआर दर्ज करना पुलिस के लिए अनिवार्य है। नए कानून में महत्वपूर्ण सुधार किए गए हैं: (1) इलेक्ट्रॉनिक एफआईआर (e-FIR) दर्ज करने की सुविधा (जिसे 3 दिनों के भीतर हस्ताक्षरित करना आवश्यक है)। (2) क्षेत्राधिकार से बाहर किसी भी पुलिस स्टेशन में ज़ीरो एफआईआर (Zero FIR) दर्ज करने का वैधानिक अधिकार। (3) 3 से 7 साल तक की सजा वाले अपराधों के लिए 14-दिवसीय प्रारंभिक जांच का प्रावधान। (4) एफआईआर दर्ज होते ही तुरंत मुफ्त प्रमाणित प्रति पाने का अधिकार। इन अधिकारों की जानकारी से नागरिक पुलिस इनकार का प्रभावी मुकाबला कर सकते हैं।

यह क्या है

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) 2023 की धारा 173 के तहत, संज्ञेय अपराध की सूचना का पुलिस स्टेशन प्रभारी द्वारा लिखित रिकॉर्ड ही एफआईआर है। मुख्य वैधानिक विशेषताएं: (1) लिखित या मौखिक दर्ज: मौखिक सूचना पर पुलिस उसे लिखकर सूचनाकर्ता को पढ़कर सुनाएगी और हस्ताक्षर लेगी। (2) मुफ्त प्रति का अधिकार: BNSS धारा 173(2) के तहत सूचनाकर्ता को एफआईआर की प्रमाणित प्रति तुरंत मुफ्त दी जाएगी। (3) ई-एफआईआर (e-FIR): इलेक्ट्रॉनिक रूप से दी गई सूचना को रिकॉर्ड किया जाएगा जिसे 3 दिनों में हस्ताक्षरित करना होगा। (4) 14-दिवसीय प्रारंभिक जांच: BNSS धारा 173(3) के तहत 3 से 7 साल तक की सजा वाले अपराधों में पुलिस डीएसपी (DSP) की अनुमति से 14 दिनों के भीतर प्रारंभिक जांच कर सकती है।

इसका उपयोग कब करें

जब भी आप किसी संज्ञेय अपराध—जैसे शारीरिक हमला, चोरी, डकैती, रंगदारी, साइबर फ्रॉड, हिट-एंड-रन दुर्घटना, घरेलू हिंसा, गुमशुदगी या संपत्ति धोखाधड़ी—के शिकार या गवाह हों, तो तुरंत एफआईआर दर्ज कराएं।

चरण-दर-चरण प्रक्रिया

  1. 1चरण 1: शिकायत स्पष्ट रूप से तैयार करें। अधिकार क्षेत्र वाले पुलिस स्टेशन जाएं (या अनिश्चित होने पर ज़ीरो एफआईआर/ई-पोर्टल का उपयोग करें)। शिकायत में: तारीख, समय, घटना का स्थान, आरोपियों के नाम/हुलिया, घटना का क्रम, गवाह और संपत्ति/नुकसान का पूरा विवरण लिखें।
  2. 2चरण 2: थाना प्रभारी (SHO) को शिकायत सौंपें। ड्यूटी ऑफिसर को लिखित शिकायत दें या मौखिक बयान दर्ज कराएं। कानूनन पुलिस अधिकारी को मौखिक बयान लिखकर आपको अपनी भाषा में पढ़कर सुनाना अनिवार्य है।
  3. 3चरण 3: विवरण जांचें और हस्ताक्षर करें। हस्ताक्षर करने से पहले ध्यान से जांचें कि हर तथ्य, नाम, तारीख और खोया सामान बिना किसी फेरबदल के सही दर्ज हुआ है या नहीं।
  4. 4चरण 4: एफआईआर की मुफ्त प्रमाणित प्रति मांगें। BNSS धारा 173(2) के तहत पुलिस स्टेशन की मोहर, एफआईआर नंबर, कानूनी धाराओं और अधिकारी के हस्ताक्षर वाली आधिकारिक कॉपी तुरंत मुफ्त प्राप्त करें।
  5. 5चरण 5: एफआईआर दर्ज न करने पर पुलिस अधीक्षक (SP) को शिकायत (BNSS धारा 173(4))। यदि एसएचओ मना करे, तो स्पीड पोस्ट द्वारा पुलिस अधीक्षक (SP) या पुलिस आयुक्त (CP) को शिकायत भेजें। SP संतुष्ट होने पर स्वयं जांच करेंगे या एफआईआर दर्ज करने का आदेश देंगे।
  6. 6चरण 6: न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष याचिका (BNSS धारा 175(3))। यदि एसपी भी कार्रवाई न करे, तो BNSS 2023 की धारा 175(3) (पुरानी CrPC 156(3)) के तहत न्यायिक मजिस्ट्रेट के पास आवेदन दायर करें। मजिस्ट्रेट पुलिस को तुरंत एफआईआर दर्ज कर जांच रिपोर्ट पेश करने का आदेश देंगे।

आवश्यक दस्तावेज़

  • सरकारी फोटो पहचान पत्र (आधार कार्ड, पासपोर्ट, वोटर आईडी या ड्राइविंग लाइसेंस)
  • सूचनाकर्ता द्वारा हस्ताक्षरित और दिनांकित लिखित शिकायत की प्रति
  • मेडिकल जांच रिपोर्ट / एमएलसी प्रति (यदि शारीरिक हमला या चोट लगी हो)
  • बैंक पासबुक / यूपीआई लेन-देन स्टेटमेंट (यदि वित्तीय या साइबर अपराध हो)
  • तस्वीरें, ऑडियो/वीडियो रिकॉर्डिंग, सीसीटीवी फुटेज या गवाहों के नंबर (यदि उपलब्ध हों)
  • स्पीड पोस्ट रसीदें और एसपी शिकायत पावती (यदि मजिस्ट्रेट के पास 175(3) का आवेदन कर रहे हों)

शुल्क

100% निःशुल्क। BNSS धारा 173(2) के तहत एफआईआर दर्ज कराना और इसकी प्रमाणित प्रति प्राप्त करना पूरी तरह मुफ्त है। एफआईआर दर्ज करने के लिए कोई भी शुल्क मांगना गैर-कानूनी है।

प्रोसेसिंग समय

संज्ञेय अपराध के लिए एफआईआर का पंजीकरण तुरंत और अनिवार्य है। BNSS 173(3) के तहत प्रारंभिक जांच 14 दिनों में पूरी होनी चाहिए। जांच रिपोर्ट (चार्जशीट) 60 से 90 दिनों में जमा की जाती है।

महत्वपूर्ण सुझाव

  • सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले 'ललिता कुमारी बनाम यूपी सरकार (2014)' का हवाला दें, जिसके अनुसार संज्ञेय अपराध की सूचना मिलने पर एफआईआर दर्ज करना अनिवार्य है।
  • थाने से निकलने से पहले हमेशा पुलिस स्टेशन की मुहर और एसएचओ के हस्ताक्षर वाली आधिकारिक एफआईआर कॉपी प्राप्त करें।
  • इलेक्ट्रॉनिक एफआईआर (e-FIR) दर्ज करने पर, BNSS 173(1) के तहत 3 दिनों के भीतर थाने जाकर भौतिक दस्तावेज पर हस्ताक्षर अवश्य करें।
  • कभी भी सादे कागज या ऐसे सारांश पर हस्ताक्षर न करें जिसमें मुख्य नाम या कानूनी धाराएं छोड़ दी गई हों।
  • यदि पुलिस क्षेत्राधिकार का बहाना बनाकर शिकायत खारिज करे, तो BNSS धारा 173(1) के तहत 'ज़ीरो एफआईआर' दर्ज करने की मांग करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1 जुलाई 2024 से लागू BNSS धारा 173 पुरानी CrPC धारा 154 की जगह लेती है। इसमें: (1) ई-एफआईआर का वैधानिक नियम (3 दिन में हस्ताक्षर), (2) क्षेत्राधिकार के बिना ज़ीरो एफआईआर का नियम, (3) 3 से 7 साल तक की सजा वाले अपराधों में 14 दिनों की प्रारंभिक जांच, और (4) पीड़ितों को डिजिटल अपडेट देने का अनिवार्य नियम जोड़ा गया है।
जी नहीं। BNSS धारा 173 और सुप्रीम कोर्ट के ललिता कुमारी फैसले के अनुसार संज्ञेय अपराध की सूचना मिलने पर एफआईआर दर्ज करना अनिवार्य है। महिलाओं या गंभीर अपराधों की एफआईआर दर्ज न करना बीएनएस धारा 199 (पुराना IPC 166A) के तहत 2 साल तक की जेल का दंडनीय अपराध है।
यदि एसएचओ मना करे: (1) BNSS धारा 173(4) के तहत स्पीड पोस्ट से पुलिस अधीक्षक (SP) या पुलिस कमिश्नर को लिखित शिकायत भेजें। (2) यदि एसपी भी कार्रवाई न करे, तो न्यायिक मजिस्ट्रेट के पास BNSS धारा 175(3) (पुराना CrPC 156(3)) के तहत अर्जी दायर करें। मजिस्ट्रेट पुलिस को एफआईआर दर्ज करने का समन जारी करेंगे।
BNSS धारा 173(3) के तहत 3 से 7 साल की सजा वाले अपराधों में, थाना प्रभारी डीएसपी (DSP) स्तर के अधिकारी की पूर्वानुमति से यह तय करने के लिए 14 दिनों के भीतर प्रारंभिक जांच कर सकता है कि क्या एफआईआर दर्ज करने का प्रथम दृष्टया मामला बनता है।
BNSS धारा 173(1) के तहत कोई भी नागरिक ऑनलाइन पोर्टल या ईमेल से संज्ञेय अपराध की सूचना भेज सकता है। पुलिस इसे ई-एफआईआर के रूप में दर्ज करेगी। हालांकि, जांच प्रक्रिया आगे बढ़ाने के लिए सूचनाकर्ता को 3 दिनों के भीतर थाने जाकर हस्ताक्षर करना होगा।
संज्ञेय अपराध (चोरी, हमला, फ्रॉड) में पुलिस एफआईआर दर्ज कर बिना वारंट गिरफ्तारी कर सकती है। असंज्ञेय अपराध (गाली-गलौज, मानहानि) में पुलिस BNSS धारा 174 के तहत एनसीआर (NCR) दर्ज करती है और बिना मजिस्ट्रेट के आदेश के जांच या गिरफ्तारी नहीं कर सकती।
जी नहीं। एफआईआर दर्ज करने में देरी होना पुलिस इनकार का कानूनी आधार नहीं है। यदि अस्पताल में भर्ती होने, सदमे या डर के कारण देरी हुई है, तो शिकायत में उसका कारण साफ लिखें। अदालतें वाजिब कारणों से हुई देरी को स्वीकार करती हैं।
यदि झूठी एफआईआर दर्ज कराई गई है, तो पीड़ित व्यक्ति BNSS 2023 की धारा 528 (पुरानी CrPC धारा 482) के तहत उच्च न्यायालय (High Court) में एफआईआर रद्द करने की याचिका दायर कर सकता है। साक्ष्य न होने या दुर्भावना सिद्ध होने पर हाई कोर्ट एफआईआर को रद्द कर देता है।
जी नहीं। NCH 1915 या 1930 साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत आपातकालीन फंड फ्रीज करने और उपभोक्ता समाधान के प्रशासनिक तंत्र हैं। 1930 पर खाता फ्रीज होने के बाद भी औपचारिक जांच और चार्जशीट के लिए साइबर थाने में BNSS 173 के तहत एफआईआर दर्ज कराना अनिवार्य है।
यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है और कानूनी सलाह नहीं है। कार्रवाई करने से पहले हमेशा आधिकारिक स्रोत से पुष्टि करें।