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Consumer Rightsसरकारी परिपत्रों से सत्यापितअंतिम अपडेट: 13 जुलाई 2026समीक्षक: Sumit Tiwari

उपभोक्ता न्यायालय फाइलिंग गाइड: ई-दाखिल प्रक्रिया, शुल्क और क्षेत्राधिकार

उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 ने ई-दाखिल (e-Daakhil) प्रणाली शुरू करके न्याय को आसान बना दिया है। उपभोक्ताओं को अब शिकायत दर्ज करने या अदालती शुल्क का भुगतान करने के लिए शारीरिक रूप से चक्कर लगाने की आवश्यकता नहीं है।

1. आर्थिक क्षेत्राधिकार (वित्तीय सीमाएं)

अपनी शिकायत तैयार करने से पहले, आपको यह निर्धारित करना होगा कि खरीदे गए सामान या सेवाओं के मूल्य के आधार पर किस आयोग के पास मामले की सुनवाई का अधिकार है:

  • जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (DCDRC): ₹50 लाख तक के मामलों की सुनवाई करता है।
  • राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (SCDRC): ₹50 लाख से ₹2 करोड़ के बीच के मामलों की सुनवाई करता है।
  • राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (NCDRC): ₹2 करोड़ से अधिक के मामलों की सुनवाई करता है।

2. क्षेत्रीय क्षेत्राधिकार (कहाँ शिकायत दर्ज करें)

2019 के अधिनियम के तहत, आप निम्न स्थानों पर मामला दर्ज कर सकते हैं:

  • जहाँ आप (उपभोक्ता) रहते हैं या काम करते हैं।
  • जहाँ कंपनी का पंजीकृत कार्यालय या शाखा कार्यालय स्थित है।
  • जहाँ विवाद का कारण उत्पन्न हुआ (जैसे खरीद या डिलीवरी का स्थान)।

3. चरण 1: अनिवार्य कानूनी नोटिस भेजना

आपको कंपनी को समस्या समाधान का एक अंतिम अवसर देना होगा:

  • खरीद की तारीख, भुगतान के प्रमाण, उत्पाद के दोष आदि का विवरण देते हुए एक पत्र तैयार करें।
  • विक्रेता को रिफंड या बदलाव के लिए 15 दिनों का समय दें।
  • स्पीड पोस्ट या पंजीकृत ईमेल के माध्यम से भेजें और डिलीवरी पावती को सुरक्षित रखें।

4. चरण 2: ई-दाखिल पर पंजीकरण

  • edaakhil.nic.in पर जाएं।
  • 'Registration' पर क्लिक करें और 'Consumer/Advocate' चुनें।
  • अपने आधार कार्ड का विवरण, ईमेल और मोबाइल नंबर दर्ज करें।
  • सक्रियण (activation) लिंक के माध्यम से पंजीकरण पूरा करें।

5. चरण 3: अदालती दस्तावेज तैयार करना

आपको निम्नलिखित दस्तावेज पीडीएफ प्रारूप में तैयार करने होंगे:

  • इंडेक्स (Index): जमा किए गए सभी दस्तावेजों की सूची।
  • मेमो ऑफ पार्टीज (Memo of Parties): उपभोक्ता और विक्रेता का नाम और पता।
  • मुख्य शिकायत याचिका (Complaint Petition): विवाद का चरण-दर-चरण विवरण और राहत की मांग।
  • शपथ पत्र (Affidavit): एक हस्ताक्षरित घोषणा कि आपके द्वारा दी गई जानकारी सच है।
  • सबूत संलग्नक: चालान, बैंक स्टेटमेंट, नोटिस की प्रति और डिलीवरी रसीद।

6. ई-दाखिल फाइलिंग शुल्क संरचना

  • ₹5 लाख तक: शून्य (निःशुल्क)
  • ₹5 लाख से ₹10 लाख: ₹200
  • ₹10 लाख से ₹20 लाख: ₹400
  • ₹20 लाख से ₹50 लाख: ₹1,000
  • ₹50 लाख से ₹1 करोड़: ₹2,000
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Sumit Tiwari

सत्यापित लेखक

संस्थापक एवं मुख्य संपादक, ComplaintAdda

सुमित तिवारी बी.टेक (B.Tech) छात्र और तकनीकी प्रेमी हैं, जो उपभोक्ता जागरूकता, साइबर सुरक्षा और सार्वजनिक शिकायत निवारण पर ध्यान केंद्रित करते हैं। वह नागरिकों को विश्वसनीय जानकारी प्रदान करने के लिए सामग्री अनुसंधान, संपादकीय समीक्षा और स्रोत सत्यापन की देखरेख करते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सबमिट करने के बाद, आयोग याचिका की समीक्षा करता है। आमतौर पर दाखिल करने के 21 दिनों के भीतर मामले की स्वीकार्यता पर फैसला होता है। आपको ईमेल/एसएमएस द्वारा अपडेट प्राप्त होंगे।
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 की धारा 69 के तहत, शिकायत विवाद का कारण उत्पन्न होने की तारीख से 2 वर्ष के भीतर दर्ज की जानी चाहिए।
यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है और कानूनी सलाह नहीं है। कार्रवाई करने से पहले हमेशा आधिकारिक स्रोत से पुष्टि करें।
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