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तथ्य जांचा गयाअंतिम अपडेट: 21 जुलाई 2026समीक्षक: ComplaintAdda Cyber Safety & Fraud Cell

साइबर अपराध रिपोर्टिंग एवं राष्ट्रीय हेल्पलाइन 1930 गाइड

भारत भर में साइबर अपराधों की जांच सूचना प्रौद्योगिकी (IT) अधिनियम, 2000 और भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 के वैधानिक ढांचे के तहत की जाती है। डिजिटल वित्तीय धोखाधड़ी, पहचान की चोरी, अकाउंट हैकिंग और ऑनलाइन उत्पीड़न में वृद्धि से निपटने के लिए गृह मंत्रालय (MHA) ने भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) की स्थापना की है और केंद्रीय राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल cybercrime.gov.in व हेल्पलाइन 1930 शुरू की है। नागरिक ऑनलाइन रिपोर्ट दर्ज कर सकते हैं, 15-अंकों के पावती नंबर से जांच ट्रैक कर सकते हैं, और महिलाओं या बच्चों के खिलाफ अपराधों के लिए गुप्त रिपोर्ट दर्ज कर सकते हैं।

विषय विशेषज्ञ सलाह एवं महत्वपूर्ण बारीकियां

सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 (धारा 66C और 66D) के तहत पहचान की चोरी और साइबर धोखाधड़ी पर 3 साल तक की जेल का प्रावधान है। वित्तीय साइबर धोखाधड़ी के मामलों में, 'गोल्डन ऑवर' (पहले 2 घंटे) में 1930 पर कॉल करने से अपराधियों के बैंक खातों को तुरंत फ्रीज किया जा सकता है।

यह क्या है

साइबर अपराध में कोई भी आपराधिक गतिविधि शामिल है जहाँ कंप्यूटर, स्मार्टफोन या नेटवर्क का उपयोग हथियार या लक्ष्य के रूप में किया जाता है। भारतीय कानून के तहत मुख्य श्रेणियां हैं: (1) वित्तीय साइबर धोखाधड़ी (यूपीआई स्कैम, फर्जी ग्राहक सेवा ऐप, एनीडेस्क/टीमव्यूअर के जरिए स्क्रीन शेयरिंग फ्रॉड)। (2) पहचान की चोरी (आईटी एक्ट धारा 66C व 66D) जिसमें पैसे मांगने के लिए क्लोन किए गए सोशल मीडिया प्रोफाइल या फर्जी व्हाट्सएप अकाउंट शामिल हैं। (3) साइबर जबरन वसूली व सेक्स्टॉर्शन जहाँ मॉर्फ्ड अश्लील तस्वीरों या वीडियो कॉल रिकॉर्डिंग को वायरल करने की धमकी दी जाती है। (4) ऑनलाइन उत्पीड़न, साइबर बुलिंग व पीछा करना। (5) हैकिंग जहाँ ईमेल, सोशल मीडिया या क्रिप्टो वॉलेट तक अनधिकृत पहुंच बनाई जाती है।

इसका उपयोग कब करें

यदि आपको साइबर हमले के कारण वित्तीय नुकसान हुआ है, आपके सोशल मीडिया या ईमेल खाते हैक हो गए हैं, या आपको ऑनलाइन ब्लैकमेल या प्रताड़ित किया जा रहा है, तो तुरंत इस गाइड का उपयोग करें। वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों में, अपराधियों के बैंक खातों को तुरंत फ्रीज करने के लिए 'गोल्डन ऑवर' (पहले 2 घंटे) में हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करना अत्यंत आवश्यक है।

चरण-दर-चरण प्रक्रिया

  1. 1चरण 1: 'गोल्डन ऑवर' में कार्रवाई करें — राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें। वित्तीय नुकसान होने पर तुरंत 1930 डायल करें। ऑपरेटर को अपना फोन नंबर, बैंक विवरण, लेनदेन यूटीआर (UTR) नंबर और समय बताएं ताकि जालसाज के खाते को फ्रीज किया जा सके।
  2. 2चरण 2: डिजिटल साक्ष्य तुरंत सुरक्षित करें। परेशान करने वाले संदेशों, ईमेल, फर्जी प्रोफाइल या रसीदों को डिलीट न करें। तारीख, समय, प्रेषक आईडी और यूआरएल के साथ अनक्रॉप्ड स्क्रीनशॉट लें।
  3. 3चरण 3: राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल cybercrime.gov.in पर जाएं। वित्तीय/हैकिंग मामलों के लिए 'Report Other Cyber Crime' या उत्पीड़न के लिए 'Report Crime Related to Women/Child' चुनें।
  4. 4चरण 4: रजिस्टर करें या गुमनाम रिपोर्ट दर्ज करें। मोबाइल नंबर से लॉगिन करें। महिलाओं/बच्चों के खिलाफ अपराधों में आप व्यक्तिगत जानकारी दिए बिना गुप्त रूप से भी शिकायत सबमिट कर सकते हैं।
  5. 5चरण 5: घटना और संदिग्ध की जानकारी भरें। घटना की तारीख, साइबर अपराध की श्रेणी (वित्तीय धोखाधड़ी, हैकिंग, प्रोफाइल क्लोनिंग, उत्पीड़न), प्रयुक्त प्लेटफॉर्म (व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम), और संदिग्ध का विवरण दर्ज करें।
  6. 6चरण 6: साक्ष्य दस्तावेज अपलोड करें। स्क्रीनशॉट, ईमेल हेडर, बैंक स्टेटमेंट और ऑडियो/वीडियो रिकॉर्डिंग की पीडीएफ या पीएनजी फाइल अपलोड करें।
  7. 7चरण 7: पावती पर्ची डाउनलोड करें और जांच को ट्रैक करें। सबमिट करने पर 15-अंकों का पावती नंबर (Acknowledgement Number) प्राप्त करें। इसकी एक प्रति औपचारिक जांच के लिए आपके स्थानीय साइबर पुलिस स्टेशन को भेजी जाती है।

आवश्यक दस्तावेज़

  • धोखाधड़ी वाले चैट, संदिग्ध संदेशों, क्लोन प्रोफाइल या ब्लैकमेल धमकियों के स्क्रीनशॉट
  • यूटीआर (UTR) / आरआरएन (RRN) नंबर दर्शाने वाला बैंक खाता विवरण (वित्तीय अपराधों के लिए)
  • संदिग्ध फ़िशिंग ईमेल के हेडर विवरण (EML फाइलें)
  • दोषी सोशल मीडिया पोस्ट, फर्जी वेबसाइट या क्लोन प्रोफाइल के वेब एड्रेस (URL) लिंक
  • शिकायतकर्ता का सरकारी पहचान पत्र (आधार या वोटर आईडी — गुमनाम रिपोर्ट के लिए आवश्यक नहीं)
  • धमकी भरे कॉल से जुड़े कॉल लॉग और ऑडियो/वीडियो रिकॉर्डिंग

शुल्क

निःशुल्क। ऑनलाइन पोर्टल cybercrime.gov.in या हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज करना पूरी तरह से मुफ्त है।

प्रोसेसिंग समय

वित्तीय धोखाधड़ी लाइन (1930) वास्तविक समय में बैंक खातों को फ्रीज करने के लिए काम करती है। ऑनलाइन शिकायतों का पावती नंबर तुरंत उत्पन्न होता है और 24 से 48 घंटे के भीतर मामला राज्य साइबर पुलिस को भेज दिया जाता है।

महत्वपूर्ण सुझाव

  • चुराए गए पैसों को फ्रीज करने की संभावना अधिकतम करने के लिए घटना के पहले 2 घंटों ('गोल्डन ऑवर') के भीतर 1930 पर कॉल करें।
  • परेशान करने वाले संदेशों या ब्लैकमेलर खातों को डिलीट न करें — प्रोफाइल लिंक के साथ स्क्रीनशॉट लेने के बाद ही ब्लॉक करें।
  • अपने सभी सोशल मीडिया और ईमेल खातों पर 2FA ऑथेंटिकेटर ऐप (एसएमएस के बजाय) सक्षम करें।
  • सेक्स्टॉर्शन ब्लैकमेलरों को कभी भी पैसे न दें — पैसे देने से केवल अधिक पैसों की मांग होगी; तुरंत 1930 या साइबर पोर्टल पर रिपोर्ट करें।
  • स्थानीय साइबर पुलिस स्टेशन में कार्रवाई के लिए हमेशा 15-अंकों का पावती नंबर अपने पास सुरक्षित रखें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'गोल्डन ऑवर' अनधिकृत इलेक्ट्रॉनिक वित्तीय धोखाधड़ी के तुरंत बाद के पहले 2 घंटों को संदर्भित करता है। इस समयसीमा में 1930 पर कॉल करने से ऑपरेटर बैंक और पेमेंट गेटवे को तुरंत अलर्ट भेजकर अपराधियों के खातों में चुराए गए पैसों को फ्रीज कर देते हैं।
गुमनाम रिपोर्टिंग (Anonymous Reporting) विशेष रूप से महिलाओं और बच्चों से जुड़े अश्लील फोटो, मॉर्फिंग या यौन उत्पीड़न के मामलों के लिए आरक्षित है जहाँ शिकायतकर्ता को अपना नाम देने की आवश्यकता नहीं होती। सामान्य रिपोर्टिंग वित्तीय धोखाधड़ी, हैकिंग और पहचान की चोरी के लिए अनिवार्य है।
पहचान की चोरी और प्रोफाइल क्लोनिंग आईटी अधिनियम, 2000 की धारा 66C (पहचान चोरी के लिए 3 साल तक की जेल और ₹1 लाख जुर्माना) और धारा 66D (कंप्यूटर संसाधन से भेष बदलकर धोखाधड़ी) के साथ-साथ भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 318(4) के तहत दंडनीय अपराध हैं।
किसी भी परिस्थिति में सेक्स्टॉर्शन ब्लैकमेलरों को पैसे न दें; पैसे देने से उनकी मांगें और बढ़ेंगी। धमकी भरे संदेशों और नंबरों के स्क्रीनशॉट लें। तुरंत हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर रिपोर्ट दर्ज करें। नंबरों को ब्लॉक करें और अपने सोशल अकाउंट्स को प्राइवेट रखें।
सबमिट करने पर 15-अंकों का पावती नंबर बनता है। शिकायत स्वतः पीड़ित के जिले के साइबर क्राइम पुलिस सेल को भेज दी जाती है। साइबर पुलिस अधिकारी साक्ष्यों की समीक्षा करते हैं, आईपी लॉग व सिम विवरण की जांच करते हैं और संज्ञेय अपराध बनने पर एफआईआर दर्ज करते हैं।
हां। भारतीय साइबर पुलिस गृह मंत्रालय की I4C इकाई और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के माध्यम से मेटा, टेलीग्राम या गूगल को धारा 91 CrPC (बीएनएसएस) के तहत कानूनी नोटिस भेजकर आईपी लॉगिन रिकॉर्ड, डिवाइस फिंगरप्रिंट और बैंक खातों की जानकारी प्राप्त करती है।
सबसे पहले प्लेटफॉर्म के आधिकारिक रिकवरी पेज (instagram.com/hacked या facebook.com/hacked) पर जाएं। अपने संपर्कों को सूचित करें कि हैक किए गए प्रोफाइल से भेजे गए संदेशों पर पैसे न भेजें। cybercrime.gov.in पर हैकिंग की रिपोर्ट दर्ज करें।
हां। राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पूरे भारत और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुलभ है। आप अपना वर्तमान स्थान दर्ज कर सकते हैं, और पोर्टल उपयुक्त क्षेत्राधिकार वाले साइबर क्राइम सेल को शिकायत भेज देगा।
ऑनलाइन साइबर पोर्टल शिकायत एक औपचारिक शिकायत है जो पुलिस जांच शुरू करती है। जब साइबर अधिकारी साक्ष्यों का सत्यापन कर संज्ञेय अपराध की पुष्टि करता है, तो शिकायत को धारा 173 बीएनएसएस के तहत आधिकारिक एफआईआर में परिवर्तित कर दिया जाता है।
यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है और कानूनी सलाह नहीं है। कार्रवाई करने से पहले हमेशा आधिकारिक स्रोत से पुष्टि करें।