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तथ्य जांचा गयाअंतिम अपडेट: 21 जुलाई 2026समीक्षक: ComplaintAdda Editorial & Research Desk

डिजिटल अरेस्ट घोटाला रिपोर्टिंग एवं कानूनी सुरक्षा गाइड

डिजिटल अरेस्ट (Digital Arrest) भारत में सक्रिय सबसे खतरनाक साइबर अपराध सिंडिकेट में से एक है। इसमें स्कैमर केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI), प्रवर्तन निदेशालय (ED), नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB), कस्टम विभाग या राज्य पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों का रूप धारण करते हैं। वे आईवीआर (IVR) कॉल्स या फोन के जरिए दावा करते हैं कि आपके आधार कार्ड से जुड़ा एक अंतरराष्ट्रीय पार्सल (जैसे FedEx पार्सल) मिला है जिसमें एमडीएमए (MDMA) ड्रग्स या जाली पासपोर्ट पाए गए हैं। फिर स्कैमर स्काइप (Skype), ज़ूम या व्हाट्सएप वीडियो कॉल पर पुलिस की वर्दी में सामने आते हैं और नकली पुलिस स्टेशन के बैकग्राउंड में आपको 'डिजिटल अरेस्ट' की धमकी देते हैं। वे पीड़ित को कमरे में बंद रहने, परिजनों से बात न करने और 'सरकारी सत्यापन' के नाम पर बैंक खातों से लाखों रुपये ट्रांसफर करने का दबाव बनाते हैं। गृह मंत्रालय (MHA), भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) और प्रधानमंत्री कार्यालय ने आधिकारिक एडवाइजरी जारी कर स्पष्ट किया है कि **भारतीय कानून में 'डिजिटल अरेस्ट' नाम की कोई कानूनी अवधारणा नहीं है**। कोई भी सरकारी एजेंसी वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी नहीं करती और न ही पैसे मांगती है।

विषय विशेषज्ञ सलाह एवं महत्वपूर्ण बारीकियां

भारतीय कानून प्रवर्तन एजेंसियां (CBI, ED, साइबर पुलिस, कस्टम्स) कभी भी स्काइप या व्हाट्सएप वीडियो कॉल पर 'डिजिटल अरेस्ट' नहीं करती हैं और न ही सत्यापन के नाम पर पैसे मांगती हैं। ऐसी कॉल आने पर तुरंत फोन काटें, 1930 पर शिकायत करें और चक्षु पोर्टल पर नंबर रिपोर्ट करें।

यह क्या है

डिजिटल अरेस्ट स्कैम में मनोवैज्ञानिक दबाव के जरिए अपराध को अंजाम दिया जाता है: (1) पुलिस वर्दी का भेष बदलना जहाँ स्कैमर नकली पुलिस कंट्रोल रूम या कोर्ट के बैकग्राउंड के सामने पुलिस वर्दी में स्काइप कॉल पर आते हैं। (2) फर्जी गिरफ्तारी वारंट पीडीएफ जहाँ सर्वोच्च न्यायालय की जाली मोहरों, आरबीआई की नकली मुहर और वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों के हस्ताक्षर वाले फर्जी वारंट व्हाट्सएप पर भेजे जाते हैं। (3) कमरे में कैद रखना जहाँ पीड़ित को वीडियो कॉल बंद करने या परिजनों से बात करने पर पुलिस रेड (SWAT Raid) की धमकी दी जाती है। (4) 'सरकारी सत्यापन' के नाम पर खाते खाली कराना जहाँ एफडी (FD), म्यूचुअल फंड तोड़कर कथित 'आरबीआई सुरक्षा खाते' में पैसे ट्रांसफर करने पर मजबूर किया जाता है।

इसका उपयोग कब करें

यदि आपको सीबीआई, पुलिस, कस्टम्स या नारकोटिक्स विभाग से पार्सल में ड्रग्स मिलने का दावा करने वाली कॉल आई है, आपसे स्काइप/ज़ूम वीडियो कॉल पर जुड़ने को कहा गया है, 'डिजिटल अरेस्ट' की धमकी दी जा रही है, या आपके परिवार का कोई सदस्य संदिग्ध वीडियो कॉल पर कमरे में बंद है, तो तुरंत इस रिफंड व कानूनी गाइड का उपयोग करें।

चरण-दर-चरण प्रक्रिया

  1. 1चरण 1: कानूनी सच्चाई समझें और कॉल तुरंत काट दें। खुद को याद दिलाएं: 'डिजिटल अरेस्ट' 100% फर्जी है। भारतीय कानून (BNSS/CrPC) में वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी का कोई प्रावधान नहीं है। तुरंत कॉल काटें, नंबर ब्लॉक करें और स्काइप/ज़ूम सेशन से बाहर निकलें।
  2. 2चरण 2: किसी भी स्थिति में पैसा ट्रांसफर न करें। पुलिस, सीबीआई, अदालत या टैक्स विभाग कभी भी निर्दोषता साबित करने के लिए पैसों के ट्रांसफर की मांग नहीं करता।
  3. 3चरण 3: राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर तुरंत कॉल करें। यदि आपने दबाव में पैसे ट्रांसफर कर दिए हैं, तो तुरंत 1930 पर कॉल करें। ऑपरेटर को स्कैमर के बैंक खाते का विवरण, यूटीआर (UTR) नंबर बताएं ताकि पुलिस पैसे को तुरंत फ्रीज कर सके।
  4. 4चरण 4: संचार साथी चक्षु (Chakshu) पोर्टल sancharsaathi.gov.in पर नंबर रिपोर्ट करें। sancharsaathi.gov.in पर जाएं, 'Chakshu' चुनें, स्कैमर का मोबाइल/व्हाट्सएप नंबर और कॉल स्क्रीनशॉट अपलोड करके पूरे भारत में उस नंबर को ब्लैकलिस्ट कराएं।
  5. 5चरण 5: cybercrime.gov.in पर आधिकारिक साइबर शिकायत दर्ज करें। cybercrime.gov.in पर लॉगिन करें, 'Impersonation / Fraud' चुनें, फर्जी वारंट के पीडीएफ और स्काइप स्क्रीनशॉट संलग्न करें और 15-अंकों का पावती नंबर प्राप्त करें।
  6. 6चरण 6: सत्यापन के लिए निकटतम पुलिस स्टेशन जाएं। यदि आपको फिर भी डर महसूस हो रहा है, तो निकटतम पुलिस स्टेशन जाएं। पुलिस अधिकारी आपको लिखित पुष्टि देंगे कि आपके खिलाफ कोई मामला दर्ज नहीं है।
  7. 7चरण 7: बैंक फ्रॉड सेल को सूचित करें। अपने बैंक में साइबर शिकायत पावती जमा करें और फ्रॉड सेल से पैसे की वापसी की कार्रवाई शुरू करने का अनुरोध करें।

आवश्यक दस्तावेज़

  • डिजिटल अरेस्ट स्कैमर द्वारा उपयोग किए गए मोबाइल नंबर, व्हाट्सएप नंबर और स्काइप आईडी
  • पुलिस की वर्दी में दिख रहे कॉलर, नकली बिल्ले और कंट्रोल रूम बैकग्राउंड के स्काइप कॉल स्क्रीनशॉट
  • व्हाट्सएप पर भेजे गए फर्जी गिरफ्तारी वारंट, सुप्रीम कोर्ट नोटिस या आरबीआई की नकली मुहरों की प्रतियां
  • स्कैमर के खाते में किए गए ट्रांसफर को दर्शाने वाला बैंक पासबुक/अकाउंट स्टेटमेंट
  • cybercrime.gov.in से प्राप्त 15-अंकों का साइबर शिकायत पावती पीडीएफ
  • संचार साथी चक्षु (Chakshu) पोर्टल से प्राप्त शिकायत संदर्भ संख्या

शुल्क

निःशुल्क। राष्ट्रीय हेल्पलाइन 1930, साइबर पोर्टल, चक्षु पोर्टल या पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज करने का कोई शुल्क नहीं है।

प्रोसेसिंग समय

हेल्पलाइन 1930 रिपोर्ट करने के 2 से 4 घंटे में स्कैमर का खाता फ्रीज कर देती है। चक्षु पोर्टल 24 से 48 घंटे में नंबर ब्लॉक कर देता है। पुलिस जांच और फंड रिकवरी में 30 से 90 दिन लगते हैं।

महत्वपूर्ण सुझाव

  • स्वर्णिम कानूनी नियम याद रखें: कोई भी भारतीय कानून प्रवर्तन एजेंसी (CBI, ED, पुलिस, कस्टम्स) वीडियो कॉल पर पूछताछ या गिरफ्तारी नहीं करती।
  • यदि कॉलर 'FedEx या DHL पार्सल में ड्रग्स मिलने' का दावा करे, तो तुरंत फोन काट दें। कस्टम्स के नोटिस डाक द्वारा आते हैं, फोन पर नहीं।
  • अज्ञात कॉलर के कहने पर कभी भी अपना कैमरा चालू न करें और न ही कमरे में खुद को बंद करें।
  • संदिग्ध नंबरों की रिपोर्ट तुरंत संचार साथी के 'चक्षु' पोर्टल (sancharsaathi.gov.in) पर करें ताकि अन्य नागरिक बच सकें।
  • यदि आप कॉल से डर महसूस कर रहे हैं, तो कोई भी वित्तीय कदम उठाने से पहले तुरंत अपने परिवार या पड़ोसियों से बात करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जी नहीं। 'डिजिटल अरेस्ट' पूरी तरह से फर्जी और काल्पनिक धोखाधड़ी है। भारतीय न्याय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) या किसी भी भारतीय कानून में 'डिजिटल अरेस्ट' नाम का कोई प्रावधान नहीं है। कोई भी सरकारी एजेंसी वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी या पूछताछ नहीं करती।
स्कैमर पीड़ित को बुरी तरह डराने के लिए नकली पुलिस वर्दी, थानों के ग्रीन-स्क्रीन बैकग्राउंड और एआई (AI) तकनीकों का उपयोग करते हैं। वे व्हाट्सएप और स्काइप प्रोफाइल पर सीबीआई या मुंबई पुलिस के असली लोगो भी लगा लेते हैं।
स्कैमर एक ऑटोमेटेड कॉल करते हैं कि 'आपका FedEx पार्सल अवैध सामान के कारण रोक लिया गया है'। बात करने पर वे दावा करते हैं कि आपके नाम से मुंबई से ताइवान भेजे गए पार्सल में 5 फर्जी पासपोर्ट और 140 ग्राम एमडीएमए ड्रग्स मिले हैं। फिर वे कॉल को स्काइप पर नकली सीबीआई अधिकारी से कनेक्ट कर देते हैं।
तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें। लेनदेन का समय, यूटीआर नंबर और स्कैमर का बैंक विवरण बताएं। 1930 प्रणाली तुरंत स्कैमर के बैंक खाते में पैसे को फ्रीज कर देती है। cybercrime.gov.in पर रिपोर्ट दर्ज करें और स्थानीय पुलिस स्टेशन जाएं।
चक्षु (sancharsaathi.gov.in) दूरसंचार विभाग (DoT) का नागरिक पोर्टल है। इसके जरिए आप फर्जी पुलिस कॉलों और व्हाट्सएप नंबरों की रिपोर्ट कर सकते हैं। सत्यापन के बाद डूटी उन नंबरों को पूरे भारत के मोबाइल नेटवर्कों पर बंद कर देता है।
जी नहीं। भारतीय आपराधिक प्रक्रिया के तहत गिरफ्तारी वारंट और समन केवल पुलिस अधिकारियों द्वारा व्यक्तिगत रूप से सौंपे जाते हैं। पुलिस या अदालत कभी भी व्हाट्सएप, ईमेल या स्काइप चैट पर वारंट नहीं भेजती।
लगातार वीडियो निगरानी का उद्देश्य पीड़ित को अत्यधिक तनाव, घबराहट और नींद की कमी में रखना होता है। कैमरा चालू रखकर वे सुनिश्चित करते हैं कि आप परिवार, दोस्तों या पुलिस से बात न कर सकें जो तुरंत इस पोल को खोल सकते हैं।
डिजिटल अरेस्ट अपराधियों पर धाराएं: (1) भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023: धारा 308 (रंगदारी/ज़बरन वसूली), धारा 318(4) (छद्म रूप धारण कर धोखाधड़ी), धारा 336(3) (सरकारी कागजात की जालसाजी)। (2) आईटी एक्ट 2000: धारा 66C और धारा 66D (3 साल तक की कैद)।
गृह मंत्रालय (MHA), I4C, आरबीआई और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अक्टूबर 2024 के 'मन की बात' कार्यक्रम में नागरिकों को चेतावनी दी: 'रुको, सोचो, एक्शन लो'। कोई भी सरकारी एजेंसी डिजिटल अरेस्ट नहीं करती। ऐसी कॉल आने पर तुरंत फोन काटें और 1930 पर शिकायत करें।

संपादकीय एवं अनुसंधान उत्तरदायित्व

यह गाइड सुमित तिवारी (संस्थापक एवं मुख्य संपादक) के निर्देशन में ComplaintAdda संपादकीय एवं अनुसंधान डेस्क द्वारा तैयार और सत्यापित की गई है। सभी वैधानिक प्रक्रियाएं, आधिकारिक पोर्टल लिंक और हेल्पलाइन नंबर सीधे सरकारी राजपत्रों, नियामक परिपत्रों (RBI, TRAI, CCPA, EPFO) और आधिकारिक पोर्टलों (.gov.in) से सत्यापित किए जाते हैं।

यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है और कानूनी सलाह नहीं है। कार्रवाई करने से पहले हमेशा आधिकारिक स्रोत से पुष्टि करें।