व्हाट्सएप/कॉल पर FedEx कस्टम्स ड्रग पार्सल स्कैम की रिपोर्ट कैसे करें: पूरी जानकारी
आज के समय में भारत में चल रहे सबसे डरावने साइबर अपराधों में से एक है 'FedEx कस्टम्स पार्सल स्कैम' (जिसके जरिए लोगों को फर्जी 'डिजिटल अरेस्ट' किया जाता है)। पीड़ितों को एक फोन या रिकॉर्डेड कॉल आती है, जिसमें दावा किया जाता है कि उनके नाम से भेजा गया एक अंतरराष्ट्रीय पार्सल, जिसमें एमडीएमए (MDMA) जैसी प्रतिबंधित ड्रग्स, जाली पासपोर्ट और एटीएम कार्ड पाए गए हैं, सीमा शुल्क विभाग (Customs) द्वारा जब्त कर लिया गया है। पुलिस केस से बचने के लिए, पीड़ित को स्काइप (Skype) या ज़ूम (Zoom) पर नकली अधिकारियों के सामने पेश होने और सरकारी जांच के नाम पर लाखों रुपये ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया जाता है। इस गाइड में हम सीखेंगे कि इस धोखाधड़ी से कैसे बचें, कॉलर की सच्चाई कैसे जांचें, और साइबर सेल में शिकायत कैसे दर्ज करें।
1. जालसाज किस स्क्रिप्ट का उपयोग करते हैं?
कस्टम्स ड्रग पार्सल घोटाला निम्नलिखित चरणों में किया जाता है:
- शुरुआती कॉल: आपको एक अनजान मोबाइल नंबर से कॉल या वॉयस मैसेज आता है कि *"आपके द्वारा भेजा गया FedEx पार्सल अवैध सामग्री के कारण वापस कर दिया गया है। अधिक जानकारी के लिए 9 दबाएं।"*
- फर्जी कस्टम एजेंट: जब आप 9 दबाते हैं, तो एक व्यक्ति कस्टम अधिकारी बनकर बात करता है। वह दावा करता है कि आपके आधार कार्ड का उपयोग करके मुंबई से ताइवान भेजे जा रहे पार्सल में 140 ग्राम एमडीएमए ड्रग्स, 5 नकली पासपोर्ट और 3 क्रेडिट कार्ड बरामद किए गए हैं।
- स्काइप पर ट्रांसफर: वह व्यक्ति कहता है कि मामला गंभीर है और वह कॉल को साइबर पुलिस (जैसे मुंबई/दिल्ली साइबर सेल या सीबीआई) को ट्रांसफर कर रहा है। फिर आपको स्काइप ऐप डाउनलोड करने को कहा जाता है, जहाँ पुलिस की वर्दी पहने स्कैमर नकली पुलिस स्टेशन के बैकग्राउंड में वीडियो कॉल पर दिखाई देते हैं।
- डिजिटल अरेस्ट की धमकी: स्कैमर आपको 'डिजिटल अरेस्ट' की धमकी देते हैं और कॉल काटने या किसी को बताने पर जेल भेजने का डर दिखाते हैं। वे आपसे आपके बैंक खाते का सारा पैसा 'सरकारी सत्यापन खाते' (Government Verification Account) में ट्रांसफर करने को कहते हैं, जिसे वे जांच के बाद 30 मिनट में वापस करने का वादा करते हैं।
- पैसे हड़पना: आपके द्वारा पैसे ट्रांसफर करते ही वे स्काइप से लॉगआउट कर लेते हैं और आपका नंबर ब्लॉक कर देते हैं।
2. नकली कस्टम कॉल की पहचान कैसे करें?
बचाव के लिए हमेशा इन महत्वपूर्ण नियमों का ध्यान रखें:
- वीडियो कॉल पर कोई गिरफ्तारी नहीं होती: सीबीआई, कस्टम्स, पुलिस या एनसीबी जैसी कोई भी सरकारी एजेंसी स्काइप, ज़ूम या व्हाट्सएप वीडियो कॉल पर न तो बयान दर्ज करती है और न ही किसी को 'डिजिटल अरेस्ट' करती है। कानून में 'डिजिटल अरेस्ट' नाम की कोई व्यवस्था नहीं है।
- सत्यापन के लिए पैसे मांगना गैरकानूनी: कोई भी सरकारी विभाग किसी संदिग्ध को निर्दोष साबित करने या बैंक फंड सत्यापित करने के लिए पैसे ट्रांसफर करने के लिए नहीं कहता।
- आधार कार्ड का झांसा: अपराधी आपका आधार नंबर और जन्मतिथि पहले से खरीद कर रखते हैं और उसे पढ़कर आपको डराते हैं। केवल आपका विवरण जानने से कोई आधिकारिक पुलिस अधिकारी नहीं बन जाता।
- आधिकारिक कस्टम नोटिस: सीमा शुल्क विभाग हमेशा स्पीड पोस्ट द्वारा आधिकारिक कागजी नोटिस भेजता है, जिसमें एक यूनिक 'Document Identification Number (DIN)' होता है। इसे आप केंद्रीय उत्पाद एवं सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) की वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन चेक कर सकते हैं।
3. फ्रॉड होने पर तुरंत शिकायत कैसे करें?
चरण 1: साइबर हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें
यदि आपने पैसे ट्रांसफर कर दिए हैं, तो तुरंत 1930 पर कॉल करें। जितनी जल्दी आप शिकायत दर्ज करेंगे, पुलिस के लिए बैंक खातों में पैसे को ब्लॉक करना उतना ही आसान होगा।
चरण 2: साइबर पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत करें
सरकारी वेबसाइट cybercrime.gov.in पर जाएं और रिपोर्ट दर्ज करें। यहाँ स्काइप चैट, वीडियो कॉल के स्क्रीनशॉट और बैंक ट्रांसफर की रसीदें अपलोड करें।
चरण 3: Chakshu पोर्टल पर सिम ब्लॉक कराएं
संचार साथी पोर्टल (sancharsaathi.gov.in) पर जाएं और Chakshu का चयन करें। यहाँ उन सभी नंबरों की रिपोर्ट करें जिनसे कॉल या धमकी आई थी, ताकि दूरसंचार विभाग (DoT) उनके सिम और मोबाइल डिवाइस को हमेशा के लिए ब्लॉक कर सके।
सुरक्षा अस्वीकरण (Disclaimer)
*इस गाइड में दी गई जानकारी केवल जन जागरूकता और शैक्षिक उद्देश्यों के लिए है। पुलिस की जांच प्रक्रिया, सीमा शुल्क (Customs) विभाग की कार्रवाई, और दूरसंचार नियम भारत के विभिन्न राज्यों में भिन्न हो सकते हैं। ComplaintAdda कोई प्रत्यक्ष कानूनी प्रतिनिधित्व नहीं देता है और न ही अपराधियों द्वारा हड़पे गए पैसों की वापसी की गारंटी देता है। यदि आपको डिजिटल अरेस्ट की धमकी मिले, तो तुरंत कॉल काटें और राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 डायल करें।*
आधिकारिक सरकारी संदर्भ एवं स्रोत
यह गाइड केवल प्राथमिक सरकारी परिपत्रों और वैधानिक संस्थाओं के आधिकारिक पोर्टलों पर आधारित है:
राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल
cybercrime.gov.in • Ministry of Home Affairs, Govt. of India
राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (NCH)
consumerhelpline.gov.in • Dept. of Consumer Affairs, Govt. of India
e-Daakhil ऑनलाइन उपभोक्ता अदालत पोर्टल
edaakhil.nic.in • National Informatics Centre (NIC)
आरबीआई शिकायत प्रबंधन प्रणाली (CMS)
cms.rbi.org.in • Reserve Bank of India
Sumit Tiwari
सत्यापित लेखकसंस्थापक एवं मुख्य संपादक, ComplaintAdda
सुमित तिवारी बी.टेक (B.Tech) छात्र और तकनीकी प्रेमी हैं, जो उपभोक्ता जागरूकता, साइबर सुरक्षा और सार्वजनिक शिकायत निवारण पर ध्यान केंद्रित करते हैं। वह नागरिकों को विश्वसनीय जानकारी प्रदान करने के लिए सामग्री अनुसंधान, संपादकीय समीक्षा और स्रोत सत्यापन की देखरेख करते हैं।
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