फर्जी जॉब ऑफर स्कैम की शिकायत कैसे करें? पैसे वापसी, 1930 हेल्पलाइन व साइबर रिपोर्ट प्रक्रिया
भारत में नौकरी के नाम पर ऑनलाइन धोखाधड़ी तेजी से फैल रही है। साइबर ठग खुद को नामी कंपनियों या जॉब पोर्टल्स का HR बताकर ₹200 से ₹5,000 तक रजिस्ट्रेशन या इंटरव्यू फीस मांगते हैं, टेलीग्राम टास्क में पैसे लगवाते हैं और फर्जी ऑफर लेटर भेजते हैं। इस गाइड में जानें कि असली और नकली भर्ती में फर्क कैसे पहचानें, 1930 हेल्पलाइन व cybercrime.gov.in पर तत्काल रिपोर्ट कैसे दर्ज कराएं, संदिग्ध बैंक खाते पर रोक लगवाने का प्रयास कैसे करें और भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 व IT एक्ट के तहत कानूनी प्रक्रिया कैसे अपनाएं।
1. सीधा समाधान: यदि कोई "HR" आपसे ₹200–₹500 रजिस्ट्रेशन फीस मांगे तो क्या करें?
प्रतिष्ठित कंपनियां और मान्यता प्राप्त जॉब पोर्टल्स उम्मीदवारों से इंटरव्यू या जॉब ऑफर के बदले कोई अग्रिम शुल्क नहीं मांगते। सरकारी नौकरियों में भी आवेदन शुल्क केवल आधिकारिक परीक्षा पोर्टल्स के माध्यम से लिया जाता है, किसी व्यक्तिगत यूपीआई या फोन कॉल के जरिए नहीं। यदि कोई व्यक्ति खुद को HR बताकर आपसे किसी भी प्रकार की अग्रिम फीस (जैसे ₹200 या ₹500) की मांग करता है, तो तुरंत भुगतान रोकें, कोई पैसा न भेजें, बातचीत बंद करें और कंपनी के आधिकारिक करियर पोर्टल पर जाकर रिक्ति की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करें।
- तत्काल भुगतान रोकें: एक बार छोटा भुगतान करने के बाद स्कैमर्स "रिफंडेबल सिक्योरिटी", "जीएसटी शुल्क" या "पोर्टल अनलॉकिंग" के नाम पर और अधिक पैसों की मांग करते हैं। कभी भी कोई अतिरिक्त भुगतान न करें।
- पहले 60 मिनट ('गोल्डन ऑवर') में 1930 पर कॉल करें: यदि आपने UPI, नेट बैंकिंग या कार्ड से पैसे ट्रांसफर कर दिए हैं, तो तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें। ऑपरेटर को UTR नंबर दें ताकि CFCFRMS प्रणाली के माध्यम से प्राप्तकर्ता बैंक को संदिग्ध खाते में मौजूद अननिकासी राशि पर अस्थायी रोक (Debit Hold/Freeze) लगाने का अलर्ट भेजा जा सके।
- cybercrime.gov.in पर औपचारिक रिपोर्ट दर्ज करें: 24 घंटे के भीतर आधिकारिक साइबर पोर्टल cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कर 14-अंकों की पावती संख्या (Acknowledgement Number) सुरक्षित रखें।
- दूरसंचार विभाग के 'चक्षु' पोर्टल पर नंबर रिपोर्ट करें: फर्जी कॉल या व्हाट्सएप नंबर की शिकायत sancharsaathi.gov.in के 'Chakshu' सेक्शन में दर्ज करें ताकि दूरसंचार विभाग संदिग्ध कनेक्शनों की जांच व कार्रवाई कर सके।
2. फर्जी जॉब स्कैम समाधान एवं एस्केलेशन वर्कफ़्लो
पैसे पर रोक लगवाने के प्रयास और कानूनी कार्रवाई के लिए आधिकारिक प्रक्रिया का पालन करें:
⚡
Resolution & Escalation Workflow
1
फर्जी नौकरी का ऑफर / फीस की मांग प्राप्त हुई
2
पैसे देने से साफ मना करें / बातचीत तुरंत बंद करें
यदि पैसे ट्रांसफर हो चुके हैं
3
तत्काल 1930 हेल्पलाइन पर कॉल करें (CFCFRMS खाता होल्ड अलर्ट)
4
cybercrime.gov.in पर आधिकारिक साइबर अपराध शिकायत दर्ज करें
5
UTR नंबर के साथ अपने गृह बैंक में लिखित विवाद आवेदन दें
6
संचार साथी 'चक्षु' पोर्टल पर मोबाइल नंबर व व्हाट्सएप हैंडल रिपोर्ट करें
यदि नुकसान अधिक है या धमकी दी जा रही है
7
साइबर सेल थाने में शिकायत / FIR दर्ज कराएं (BNS धारा 318 व IT एक्ट 66D)
8
जॉब पोर्टल (Naukri, LinkedIn, Indeed) पर फर्जी प्रोफाइल रिपोर्ट करें
3. भारत में सक्रिय 6 सबसे बड़े फर्जी जॉब स्कैम
साइबर ठग मनोवैज्ञानिक हेरफेर और फर्जी पहचान का उपयोग करते हैं:
A. नॉमिनल रजिस्ट्रेशन व इंटरव्यू फीस स्कैम (₹200–₹1,000)
- तरीका: उम्मीदवार को कॉल या मैसेज आता है: *"आपका रिज्यूम नामी कंपनी में बैक-ऑफिस पद के लिए शॉर्टलिस्ट हुआ है, वेतन ₹35,000–₹50,000 होगा। इंटरव्यू स्लॉट बुक करने या पोर्टल एक्टिवेशन के लिए मात्र ₹200 या ₹350 इस UPI पर भेजें।"*
- चाल: रकम इतनी कम रखी जाती है कि उम्मीदवार बिना सोचे पैसे ट्रांसफर कर देता है। इसके बाद डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के नाम पर ₹1,500 और लैपटॉप सिक्योरिटी के नाम पर ₹8,000 मांगे जाते हैं।
- सच्चाई: कोई वास्तविक इंटरव्यू नहीं होता और पैसे म्यूल खातों में चले जाते हैं।
B. टेलीग्राम व व्हाट्सएप टास्क स्कैम (प्रीपेड टास्क फ्रॉड)
- तरीका: व्हाट्सएप पर पार्ट-टाइम काम का ऑफर आता है—यूट्यूब वीडियो लाइक करना या गूगल मैप्स पर रिव्यू देना।
- जाल: विश्वास जीतने के लिए पहले 2-3 टास्क पर ₹150–₹300 का वास्तविक भुगतान किया जाता है। इसके बाद टेलीग्राम ग्रुप में जोड़कर "मर्चेंट टास्क" के नाम पर ₹3,000 जमा करने को कहा जाता है।
- धोखाधड़ी: जैसे ही पीड़ित ₹50,000 से लेकर लाखों रुपये जमा कर देता है, फर्जी डैशबोर्ड पर निकासी रोक दी जाती है और पैसे निकालने के नाम पर अतिरिक्त टैक्स की मांग की जाती है। अंत में संपर्क काट दिया जाता है।
C. विदेश में नौकरी और वर्क परमिट वीजा फ्रॉड
- तरीका: अनधिकृत एजेंसियां खाड़ी देशों, यूरोप या दक्षिण-पूर्व एशिया में भारी सैलरी की नौकरी का झांसा देकर ₹1 लाख से ₹5 लाख तक ऐंठती हैं।
- खतरा: पीड़ितों को एम्प्लॉयमेंट वीजा के स्थान पर टूरिस्ट वीजा थमा दिया जाता है, या लाओस/कंबोडिया जैसे देशों में साइबर फ्रॉड सिंडिकेट्स के हाथों फंसा दिया जाता है जहां उनसे जबरन ऑनलाइन धोखाधड़ी कराई जाती है।
- कानूनी नियम: इमिग्रेशन एक्ट 1983 की धारा 10 के तहत विदेश में भर्ती का कार्य केवल विदेश मंत्रालय के प्रोटेक्टर जनरल ऑफ इमिग्रेंट्स (PGE) द्वारा पंजीकृत एजेंसियां ही कर सकती हैं। पंजीकृत एजेंसियां केवल सरकार द्वारा तय सेवा शुल्क ही ले सकती हैं। हमेशा emigrate.gov.in पर एजेंसी का 7-अंकों का RC नंबर जांचें।
D. डेटा एंट्री और 'लीगल नोटिस' जबरन वसूली रैकेट
- तरीका: घर बैठे टाइपिंग का काम दिया जाता है और कड़ा ऑनलाइन एग्रीमेंट कराया जाता है।
- जबरन वसूली: काम जमा होते ही काम को रिजेक्ट बताकर फर्जी लीगल नोटिस भेजा जाता है और पुलिस केस की धमकी देकर समझौते के नाम पर ₹10,000–₹50,000 की मांग की जाती है।
- कानूनी सच्चाई: भारतीय अनुबंध अधिनियम की धारा 19 व 23 के अनुसार धोखाधड़ी और जबरदस्ती से कराया गया कोई भी समझौता कानूनन शून्य या शून्यकरणीय (Void/Voidable) होता है। धमकी देकर पैसे वसूलना BNS 2023 की धारा 308 (Extortion) के तहत दंडनीय अपराध है।
E. जाली MNC ऑफर लेटर व यूनिफॉर्म शुल्क घोटाला
- तरीका: नामी कंपनियों के जाली लेटरहेड और फर्जी मुहरों वाले पीडीएफ ऑफर लेटर भेजे जाते हैं।
- मांग: गेट पास, कंपनी आईडी या यूनिफॉर्म के नाम पर अग्रिम राशि "वेंडर अकाउंट" में जमा करने को कहा जाता है।
- सच्चाई: वास्तविक कंपनियां नए कर्मचारियों से पहचान पत्र या उपकरण का कोई अग्रिम शुल्क नहीं मांगतीं।
F. होम पैकेजिंग व कच्चा माल (Raw Material) घोटाला
- तरीका: अगरबत्ती या पेन रीफिलिंग का सामान घर पहुंचाने और उत्पाद वापस खरीदने का वादा किया जाता है।
- धोखाधड़ी: सिक्योरिटी डिपॉजिट के नाम पर ₹5,000–₹20,000 लिए जाते हैं। माल तैयार होने पर उसे घटिया बताकर खारिज कर दिया जाता है और पैसे हड़प लिए जाते हैं।
4. असली बनाम फर्जी भर्ती की 5-बिंदु पहचान प्रणाली
| जांच का आधार | असली कॉर्पोरेट भर्ती | फर्जी भर्ती के संकेत (Red Flags) |
|---|---|---|
| ईमेल डोमेन | हमेशा आधिकारिक कॉर्पोरेट डोमेन से ईमेल (उदा. @infosys.com, @amazon.jobs)। | फ्री ईमेल डोमेन जैसे @gmail.com, @yahoo.com या मिलते-जुलते स्पूफ डोमेन। |
| फीस की मांग | आवेदन, इंटरव्यू या चयन के किसी चरण पर कोई अग्रिम शुल्क नहीं। | किसी भी नाम पर अग्रिम राशि (रजिस्ट्रेशन, मेडिकल, लैपटॉप सिक्योरिटी) की मांग। |
| इंटरव्यू का माध्यम | आधिकारिक वीडियो प्लेटफॉर्म (MS Teams, Google Meet) पर वीडियो इंटरव्यू या व्यक्तिगत मुलाकात। | केवल व्हाट्सएप या टेलीग्राम चैट पर संदेशों के जरिए चयन या 2 मिनट की साधारण कॉल। |
| ऑफर लेटर की सत्यता | कंपनी के करियर पोर्टल पर जॉब आईडी और अधिकृत विवरण के साथ सत्यापित होता है। | केवल व्हाट्सएप पर पीडीएफ भेजा जाता है; वर्तनी की गलतियां और अग्रिम फीस की शर्त होती है। |
| विदेशी नौकरी का नियम | विदेश मंत्रालय के emigrate.gov.in पोर्टल पर वैध 7-अंकों का RC नंबर दर्ज होता है। | कोई PGE पंजीकरण नहीं, सोशल मीडिया पर प्रचार, वर्क वीजा के बदले टूरिस्ट वीजा देना। |
5. फर्जी जॉब फ्रॉड की शिकायत कैसे दर्ज करें: चरण-दर-चरण प्रक्रिया
यदि आपके साथ कोई वित्तीय धोखाधड़ी हुई है, तो तुरंत निम्नलिखित प्रक्रिया अपनाएं:
चरण 1: पहले 60 मिनट में 1930 डायल करें
- पैसे ट्रांसफर होते ही तुरंत 1930 पर कॉल करें।
- ऑपरेटर को अपना विवरण, बैंक खाता, ट्रांजैक्शन यूटीआर (UTR) नंबर और प्राप्तकर्ता का विवरण दें।
- गृह मंत्रालय का CFCFRMS सिस्टम प्राप्तकर्ता बैंक को तुरंत अलर्ट भेजता है ताकि संदिग्ध खाते में शेष बची राशि पर अस्थायी रोक (Hold) लगाने का प्रयास किया जा सके। ध्यान दें कि यदि पैसा पहले ही निकाला जा चुका है, तो रोक लगाना संभव नहीं होता।
चरण 2: cybercrime.gov.in पोर्टल पर औपचारिक शिकायत दर्ज करें
- आधिकारिक पोर्टल cybercrime.gov.in पर जाएं।
- "Report Other Cyber Crime" पर क्लिक कर मोबाइल नंबर से लॉग इन करें।
- श्रेणी चुनें: "Financial Fraud" -> उप-श्रेणी: "UPI / Internet Banking / Job Fraud"।
- संदिग्ध मोबाइल नंबर, चैट के स्क्रीनशॉट, फर्जी ऑफर लेटर और बैंक स्टेटमेंट अपलोड करें।
- भविष्य के संदर्भ के लिए 14-अंकों का एक्नॉलेजमेंट नंबर संभाल कर रखें।
चरण 3: दूरसंचार विभाग के 'चक्षु' (Chakshu) पर शिकायत करें
- sancharsaathi.gov.in पर जाएं और Chakshu पोर्टल खोलें।
- फर्जी कॉल या संदेश भेजने वाले नंबर की रिपोर्ट करें।
- दूरसंचार विभाग इन जानकारियों के आधार पर संदिग्ध कनेक्शनों का सत्यापन कराता है और नियमों के तहत फर्जी सिम कार्ड व हैंडसेट ब्लॉक करने की कार्रवाई करता है।
चरण 4: अपने बैंक में लिखित शिकायत दर्ज कराएं
- अपनी होम बैंक शाखा में जाकर लिखित विवाद पत्र (Dispute Letter) दें।
- आवेदन के साथ साइबर क्राइम पावती और यूटीआर नंबर संलग्न करें और बैंक से लाभार्थी बैंक के साथ समन्वय करने का अनुरोध करें।
चरण 5: साइबर थाने में पुलिस शिकायत / एफआईआर दर्ज कराएं
- यदि नुकसान अधिक है या ठग धमकी दे रहे हैं:
- नजदीकी साइबर अपराध पुलिस स्टेशन में सभी दस्तावेजों के साथ शिकायत दें।
- भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) 2023 की धारा 173 के तहत संज्ञेय अपराधों की सूचना दर्ज की जाती है। ध्यान दें कि BNSS की धारा 173(3) के तहत 3 से 7 वर्ष की सजा वाले अपराधों में पुलिस डीएसपी स्तर के अधिकारी की अनुमति से एफआईआर दर्ज करने से पहले 14 दिनों के भीतर प्रारंभिक जांच (Preliminary Enquiry) कर सकती है।
- BNS धारा 318(4) (धोखाधड़ी) और आईटी एक्ट धारा 66D के तहत कार्रवाई की मांग करें।
चरण 6: जॉब पोर्टल्स पर फर्जी प्रोफाइल रिपोर्ट करें
- Naukri.com:
abuse@naukri.comपर ईमेल करें या जॉब पोस्टिंग के नीचे "Report this Job" पर क्लिक करें। - LinkedIn: प्रोफाइल पर तीन बिंदुओं (...) पर क्लिक कर "Report / Block" -> "Fraud or scam" चुनें।
- Indeed: नौकरी विवरण के नीचे जाकर "Report Job" पर क्लिक करें।
6. आवश्यक साक्ष्य चेकलिस्ट (Evidence Preservation Checklist)
शिकायत दर्ज करते समय इन साक्ष्यों को सुरक्षित रखें:
- बैंक स्टेटमेंट व यूटीआर (UTR): ट्रांजैक्शन का समय, तारीख और प्राप्तकर्ता की यूपीआई आईडी दर्शाने वाली बैंक पर्ची।
- चैट स्क्रीनशॉट्स: व्हाट्सएप या टेलीग्राम बातचीत के पूरे स्क्रीनशॉट्स, जिसमें ठग का नंबर या यूजरनेम साफ दिखे।
- दस्तावेज: भेजे गए फर्जी ऑफर लेटर, एग्रीमेंट या कानूनी नोटिस की मूल पीडीएफ फाइल।
- ईमेल हेडर: यदि ईमेल आई थी, तो उसका
.emlफॉर्मेट या मूल हेडर डाउनलोड करें। - कॉल लॉग: फोन आने का समय, अवधि और उपलब्ध होने पर कॉल रिकॉर्डिंग।
7. पैसे वापसी की सच्चाई: क्या डूबा हुआ पैसा वापस मिल सकता है?
[!IMPORTANT]
रिकवरी की वास्तविक स्थिति:
पैसा केवल तभी वापस मिलना संभव होता है जब ठगों ने उसे एटीएम से न निकाला हो या कई बैंक खातों व क्रिप्टो में न घुमाया हो।
> * शीघ्र रिपोर्टिंग का महत्व: घटना के तुरंत बाद 1930 पर कॉल करने से CFCFRMS के जरिए बैंक को अलर्ट जाता है और खाते में बची राशि पर होल्ड लगाने का प्रयास किया जाता है। लेकिन यदि पैसा पहले ही निकाला जा चुका है, तो इस प्रक्रिया से तत्काल रिकवरी नहीं हो सकती।
* अदालत से रिलीज आदेश (Section 503 BNSS): पुलिस द्वारा BNSS की धारा 106 (पूर्व में CrPC 102) के तहत खाते पर रोक लगवाए जाने के बाद, बैंक बिना कानूनी आदेश के पैसा सीधे आवेदक को नहीं दे सकता। इसके लिए संबंधित मजिस्ट्रेट अदालत में BNSS 2023 की धारा 503 (पूर्व में CrPC 457) के तहत अर्जी देकर जब्त संपत्ति की वापसी का आदेश प्राप्त करना होता है।
* फर्जी 'रिकवरी हैकर्स' से सावधान रहें: सोशल मीडिया या इंस्टाग्राम पर डूबा पैसा वापस दिलाने का दावा करने वाले निजी "हैकर्स" या "फंड रिकवरी एजेंट्स" से पूरी तरह बचें। कानूनन निजी व्यक्तियों को बैंक खाते फ्रीज करने या पैसे जब्त करने का कोई अधिकार नहीं है। भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) के अनुसार ऐसे दावे करने वाले लोग अक्सर पीड़ितों से दोबारा ठगी करने वाले अपराधी होते हैं।
8. फर्जी नौकरी और जबरन वसूली पर कानूनी प्रावधान (2026 Legal Framework)
| कानूनी धारा | अपराध का विवरण | निर्धारित सजा |
|---|---|---|
| BNS धारा 318(4) *(पूर्व में IPC 420)* | धोखाधड़ी और बेईमानी से संपत्ति या पैसे ऐंठना (झूठे वादे पर पैसे लेना)। | 7 वर्ष तक का कारावास + जुर्माना |
| BNS धारा 319(2) *(पूर्व में IPC 419)* | प्रतिरूपण (Impersonation) द्वारा छल करना (फर्जी HR बनना)। | 5 वर्ष तक की जेल, या जुर्माना, या दोनों |
| BNS धारा 336(3) व 340(2) *(पूर्व में IPC 468 व 471)* | धोखाधड़ी के लिए जाली दस्तावेज बनाना व उनका उपयोग करना। | 7 वर्ष तक की जेल + जुर्माना |
| BNS धारा 308(2) *(पूर्व में IPC 384)* | जबरन वसूली (Extortion) - केस की धमकी देकर पैसे वसूलना। | 7 वर्ष तक की जेल, या जुर्माना, या दोनों |
| आईटी एक्ट धारा 66D | कंप्यूटर या संचार माध्यमों से भेष बदलकर धोखाधड़ी करना। | 3 वर्ष तक की जेल और/या ₹1,00,000 जुर्माना |
| इमिग्रेशन एक्ट 1983 की धारा 24 | बिना विदेश मंत्रालय पंजीकरण के विदेश में भर्ती करना। | 2 वर्ष तक का कारावास + जुर्माना (दोबारा अपराध पर 5 वर्ष तक) |
| भारतीय अनुबंध अधिनियम धारा 23 | कपटपूर्ण या गैरकानूनी उद्देश्य वाले समझौते कानूनन शून्य (Void) होते हैं। | अनुबंध शून्य व अप्रवर्तनीय |
9. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: अगर किसी जॉब पोर्टल का HR फोन करके ₹200 रजिस्ट्रेशन फीस मांगे तो मुझे क्या करना चाहिए?
उत्तर: पैसे बिल्कुल न दें। नौकरी या इंटरव्यू के नाम पर अग्रिम फीस मांगना भर्ती धोखाधड़ी का प्रमुख संकेत है। वैध नियोक्ता और जॉब पोर्टल्स इंटरव्यू के लिए कोई शुल्क नहीं मांगते। बातचीत बंद करें, नंबर ब्लॉक करें, संचार साथी के चक्षु पोर्टल पर रिपोर्ट करें और जॉब पोर्टल के हेल्पडेस्क को सूचित करें।
प्रश्न 2: भारत में नौकरी के फर्जीवाड़े की शिकायत के लिए आधिकारिक हेल्पलाइन क्या है?
उत्तर: गृह मंत्रालय की राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन संख्या 1930 है। इसके अतिरिक्त आप cybercrime.gov.in पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज कर सकते हैं।
प्रश्न 3: क्या टेलीग्राम टास्क स्कैम में डूबे पैसे वापस मिल सकते हैं?
उत्तर: रिकवरी केवल तभी संभव है जब 1930 पर समय रहते रिपोर्ट की जाए और बैंक खाते में मौजूद राशि पर रोक लगाने में सफल हो जाए। राशि फ्रीज होने के बाद मजिस्ट्रेट अदालत से BNSS धारा 503 के तहत आदेश प्राप्त कर प्रक्रिया पूरी की जा सकती है। यदि पैसा निकाला जा चुका है, तो तत्काल वापसी की गारंटी नहीं होती।
प्रश्न 4: मैंने डेटा एंट्री एग्रीमेंट साइन किया था और अब वे कोर्ट केस की धमकी दे रहे हैं, क्या मुझे पैसे देने चाहिए?
उत्तर: बिल्कुल नहीं। कोई भी जबरन वसूली शुल्क न दें। भारतीय अनुबंध अधिनियम की धारा 19 व 23 के तहत धोखाधड़ी या दबाव से कराए गए समझौते शून्य या शून्यकरणीय होते हैं। धमकी देकर पैसे मांगना BNS धारा 308 के तहत जबरन वसूली (Extortion) है। इसकी शिकायत तुरंत cybercrime.gov.in पर दर्ज कराएं।
प्रश्न 5: विदेशी नौकरी का ऑफर असली है या नकली, कैसे जांचें?
उत्तर: भर्ती एजेंसी का 7-अंकों का RC नंबर विदेश मंत्रालय की वेबसाइट emigrate.gov.in पर सत्यापित करें। वास्तविक कंपनियां विजिट वीजा के बदले वर्क परमिट देती हैं और केवल सरकार द्वारा निर्धारित सेवा शुल्क ही ले सकती हैं।
प्रश्न 6: असली कंपनियां इंटरव्यू और हायरिंग कैसे करती हैं?
उत्तर: असली कंपनियां हमेशा अपनी आधिकारिक कॉर्पोरेट ईमेल आईडी से संपर्क करती हैं, वीडियो प्लेटफॉर्म (MS Teams, Google Meet) पर औपचारिक इंटरव्यू लेती हैं और अपनी करियर वेबसाइट पर रिक्ति प्रदर्शित करती हैं। वे केवल व्हाट्सएप या टेलीग्राम चैट पर चयन नहीं करतीं।
प्रश्न 7: चक्षु (Chakshu) पोर्टल क्या है और यह कैसे मदद करता है?
उत्तर: चक्षु दूरसंचार विभाग (DoT) का आधिकारिक पोर्टल है जो sancharsaathi.gov.in पर उपलब्ध है। यहां आप संदिग्ध कॉल या व्हाट्सएप नंबरों की रिपोर्ट कर सकते हैं, जिससे सरकार जांच कर फर्जी कनेक्शनों को ब्लॉक करने की कार्रवाई करती है।
प्रश्न 8: जॉब फ्रॉड की शिकायत के लिए कौन से सबूत जरूरी हैं?
उत्तर: (1) बैंक स्टेटमेंट व यूटीआर नंबर, (2) व्हाट्सएप/टेलीग्राम चैट के स्क्रीनशॉट, (3) फर्जी ऑफर लेटर या एग्रीमेंट की कॉपी, (4) ईमेल हेडर, और (5) स्कैमर के फोन नंबर व बैंक खाते का विवरण।
प्रश्न 9: क्या ऑनलाइन 'मनी रिकवरी हैकर्स' से मदद लेनी चाहिए?
उत्तर: नहीं। सोशल मीडिया पर पैसा वापस दिलाने का दावा करने वाले निजी व्यक्ति या 'हैकर्स' कानूनन अधिकृत नहीं होते। I4C के अनुसार ऐसे लोग अक्सर पीड़ितों से अग्रिम फीस ऐंठने वाले अपराधी होते हैं। केवल आधिकारिक पुलिस और कानूनी प्रक्रिया अपनाएं।
प्रश्न 10: नए आपराधिक कानूनों के तहत फर्जी जॉब स्कैम पर कौन सी धाराएं लगती हैं?
उत्तर: भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 318(4) (धोखाधड़ी), धारा 319 (प्रतिरूपण), धारा 336/340 (फर्जी दस्तावेज), धारा 308 (जबरन वसूली) और आईटी एक्ट की धारा 66D के तहत कानूनी कार्रवाई की जाती है।
10. कानूनी अस्वीकरण
*यह मार्गदर्शिका ComplaintAdda द्वारा जन-जागरूकता, नागरिक सुरक्षा और कानूनी साक्षरता के उद्देश्य से प्रकाशित की गई है। ComplaintAdda एक स्वतंत्र उपभोक्ता मंच है और यह किसी भी भर्ती एजेंसी, कंपनी या सरकारी विभाग से संबद्ध नहीं है। साइबर अपराध की आपात स्थिति में तुरंत 1930 पर संपर्क करें।*
आधिकारिक सरकारी संदर्भ एवं स्रोत
यह गाइड केवल प्राथमिक सरकारी परिपत्रों और वैधानिक संस्थाओं के आधिकारिक पोर्टलों पर आधारित है:
राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल
cybercrime.gov.in • Ministry of Home Affairs, Govt. of India
राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (NCH)
consumerhelpline.gov.in • Dept. of Consumer Affairs, Govt. of India
e-Daakhil ऑनलाइन उपभोक्ता अदालत पोर्टल
edaakhil.nic.in • National Informatics Centre (NIC)
आरबीआई शिकायत प्रबंधन प्रणाली (CMS)
cms.rbi.org.in • Reserve Bank of India
Sumit Tiwari
सत्यापित लेखकसंस्थापक एवं मुख्य संपादक, ComplaintAdda
सुमित तिवारी बी.टेक (B.Tech) छात्र और तकनीकी प्रेमी हैं, जो उपभोक्ता जागरूकता, साइबर सुरक्षा और सार्वजनिक शिकायत निवारण पर ध्यान केंद्रित करते हैं। वह नागरिकों को विश्वसनीय जानकारी प्रदान करने के लिए सामग्री अनुसंधान, संपादकीय समीक्षा और स्रोत सत्यापन की देखरेख करते हैं।
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